बंगाल में अंडे पर पॉलिटिक्स! शुभेंदु सरकार के फैसले पर क्यों भड़की TMC

बंगाल में अंडे पर पॉलिटिक्स! शुभेंदु सरकार के फैसले पर क्यों भड़की TMC


पश्चिम बंगाल के सरकारी स्कूलों में मिड-डे-मील में अंडे दिए जाने को लेकर विवाद और राजनीतिक घमासान अभी भी जारी है. बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार की तरफ स्कूली बच्चों के मिड-डे-मील के साथ हफ्ते में दो दिन अंडा दिए जाने की घोषणा की गई है, लेकिन तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक कुणाल घोष ने सरकार के इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि सरकार बच्चों को अंडा हफ्ते में सिर्फ दो ही दिन क्यों देगी, बच्चों को हर दिन अंडा दिया जाना चाहिए.

मिड-डे-मील में अंडा शामिल करने पर बोले कुणाल घोष

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक कुणाल घोष ने रविवार (2 अगस्त, 2026) को न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, ‘स्कूलों में बच्चों को मिड-डे-मील में हफ्ते में सिर्फ दो ही दिन क्यों, हर रोज उन्हें खाने में अंडा देना चाहिए. जब भी स्कूल खुले हों, बच्चों को अंडा दिया जाना चाहिए. ये तो हमारी मांग के बाद दो अंडे देने की बात कही गई है, नहीं तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) वालों ने तो मेन्यू से अंडा पूरी तरह से निकाल ही दिया था.’ 

उन्होंने कहा, ‘इस्कॉन एक सम्मानिक संगठन है. मैं भी इस्कॉन में जाता हूं. प्रसाद खाता हूं, लेकिन वो एक धार्मिक प्रतिष्ठान है और उनका जो भी मेन्यू होगा, वो पूरी तरह से शुद्ध शाकाहारी होगा, लेकिन पोषण के लिहाज से अंडा बेहद फायदेमंद है और बच्चों के लिए भी यह एक बड़ा आकर्षण है. जो लोग शाकाहारी लाइफस्टाइल अपनाते हैं, उनके लिए शाकाहारी खाना सही है, लेकिन जो लोग अंडा खाते हैं, उन्हें इससे वंचित क्यों रखा जाए? अंडे को सिर्फ हफ्ते में दो दिन नहीं, बल्कि मिड-डे-मील का रेगुलर हिस्सा बनाया जाना चाहिए.’

बागी सांसदों को लेकर बोले टीएमसी विधायक

वहीं, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों की पार्टी में वापसी को लेकर भी उन्होंने टिप्पणी की है. कुणाल घोष ने कहा, ‘जब वे लोकसभा में बोलते हैं, तो ब्रॉडकास्टिंग में उनकी पहचान टीएमसी के रूप में दिखाती जाती है, लेकिन लगता है कि उन्हें खुद अपनी राजनीतिक स्थिति का ही पता नहीं है. वे टीएमसी के टिकट पर चुनाव जीतकर आए, बीजेपी के साथ बैठकें करते रहे, फिर दावा करते हैं कि वे NCPI में शामिल हो गए हैं, जबकि संसद उन्हें अब भी टीएमसी के रूप में पहचानती है. आखिर इन लोगों की असली राजनीतिक पहचान क्या है?’ 

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