खास बात यह है कि दिल्ली को दुनिया का सबसे किफायती स्टूडेंट शहर भी माना गया है. आपको बता दें कि ग्लोबल हायर एजुकेशन एनालिटिक्स फर्म QS Quacquarelli Symonds की ओर से जारी इस रैंकिंग में दुनिया के 150 शहरों का मूल्यांकन किया गया. रैंकिंग तैयार करने के लिए यूनिवर्सिटी की क्वालिटी, रोजगार के अवसर, पढ़ाई का खर्च, रहने की गुणवत्ता, अंतरराष्ट्रीय छात्रों की मौजूदगी और छात्रों के अनुभव जैसे 6 प्रमुख मानकों को आधार बनाया गया है.

क्यूएस बेस्ट स्टूडेंट सिटीज रैंकिंग 2027 में सियोल ने 100 के परफेक्ट स्कोर के साथ पहला स्थान हासिल किया है. दूसरे स्थान पर जापान का टोक्यो और तीसरे स्थान पर ब्रिटेन का लंदन रहा. मेलबर्न चौथे स्थान पर रहा जबकि म्यूनिख और सिडनी संयुक्त रूप से पांचवें स्थान पर रहे. इसके अलावा पेरिस, बर्लिन, वियना और ज्यूरिख भी टॉप-10 में शामिल है.

भारतीय शहरों में मुंबई ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है. मुंबई इस साल 7 स्थान की छलांग लगाकर 91वें स्थान पर पहुंच गई और भारत की सबसे ऊंची रैंकिंग वाली स्टूडेंट सिटी बन गई. शहर को रोजगार के अवसर और किफायती शिक्षा के मामले में अच्छा स्कोर मिला. क्यूएस के अनुसार मुंबई का एंपलॉयर एक्टिविटी स्कोर मजबूत रहा, जबकि अफॉर्डेबिलिटी के मामले में भी शहर दुनिया के बेहतरीन शहरों में शामिल रहा.

वहीं राजधानी दिल्ली इस बार 104वें स्थान से सुधार करते हुए 99वें स्थान पर पहुंच गई है. इसी के साथ दिल्ली ने पहली बार ग्लोबल टॉप 100 स्टूडेंट सिटीज में जगह बनाई. इससे बड़ी उपलब्धि यह रही कि दिल्ली को दुनिया का सबसे किफायती स्टूडेंट शहर घोषित किया गया.

क्यूएस के अनुसार दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए औसत वार्षिक ट्यूशन फीस करीब 2,700 अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 2.6 लाख रुपये हैं. इसके अलावा रोजगार के अवसरों के मामले में भी दिल्ली को अच्छा स्कोर मिला और इस कैटेगरी में शहर दुनिया में 29वें स्थान पर रहा.

इस साल बेंगलुरु भारतीय शहरों में एकमात्र ऐसा शहर रहा, जिसकी रैंकिंग में गिरावट दर्ज की गई. बेंगलुरु 6 स्थान फिसलकर संयुक्त रूप से 114वें स्थान पर पहुंच गया है. क्यूएस के अनुसार इसका एक कारण यहां अंतरराष्ट्रीय छात्रों की ज्यादा ट्यूशन फीस है, जो लगभग 5,400 अमेरिकी डॉलर प्रतिवर्ष है. वहीं चेन्नई ने पांच स्थान का सुधार करते हुए 123वीं क्यूएस रैंक हासिल की है.

आपको बता दें कि क्यूएस बेस्ट स्टूडेंट सिटीज रैंकिंग में केवल उन्हीं शहरों को शामिल किया जाता है, जिसकी आबादी 2.5 लाख से ज्यादा हो और जहां क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में शामिल कम से कम दो यूनिवर्सिटी मौजूद हो. इसके बाद यूनिवर्सिटी की क्वालिटी, रोजगार के अवसर, शिक्षा और रहने का खर्च, शहर की आकर्षक क्षमता, अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या और छात्रों के अनुभव समेत कई कारकों के आधार पर अंतिम रैंकिंग तैयार की जाती है.
Published at : 22 Jul 2026 06:28 PM (IST)






