क्या क्रिप्टो करेंसी को रेगुलेट करने का वित्त मंत्रालय की तरफ से आया आदेश? सरकार ने बताई सच्चाई

क्या क्रिप्टो करेंसी को रेगुलेट करने का वित्त मंत्रालय की तरफ से आया आदेश? सरकार ने बताई सच्चाई


केन्द्रीय वित्त मंत्रालय ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) को क्रिप्टोकरेंसी को रेगुलेट करने के निर्देश दे दिए हैं. यह भी कहा गया है कि दोनों नियामक इस पर सहमत नहीं हैं, क्योंकि ऐसा करना क्रिप्टो को आधिकारिक मान्यता देने जैसा होगा. इस दावे के साथ वित्त मंत्री, RBI और SEBI की तस्वीरें साझा कर इसे बड़ी सरकारी घोषणा के रूप में पेश किया जा रहा है. लेकिन क्या वास्तव में सरकार ने ऐसा कोई फैसला लिया है?

सोशल मीडिया पर पोस्ट वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया गया है कि दोनों नियामक इस कदम को लेकर असहज हैं, क्योंकि इससे क्रिप्टोकरेंसी को अप्रत्यक्ष रूप से आधिकारिक मान्यता मिलने का संदेश जा सकता है. इस दावे को विश्वसनीय दिखाने के लिए वित्त मंत्री, RBI और SEBI की तस्वीरों के साथ इसे एक बड़ी सरकारी घोषणा के तौर पर साझा किया जा रहा है. लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई केंद्र सरकार ने ऐसा कोई निर्देश जारी किया है या फिर यह महज एक वायरल अफवाह है?

फैक्ट चेक: सच क्या है?

जांच में ये दावा पूरी तरह फर्जी निकला. सरकार की आधिकारिक फैक्ट-चेक एजेंसी PIB Fact Check ने इस वायरल पोस्ट का खंडन करते हुए स्पष्ट किया है कि वित्त मंत्रालय ने RBI और SEBI को क्रिप्टोकरेंसी के रेगुलेशन को लेकर कोई निर्देश जारी नहीं किया है. PIB ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि यह दावा Fake है. साथ ही ये भी स्पष्ट किया गया कि भारत सरकार फिलहाल क्रिप्टोकरेंसी को किसी आधिकारिक परिसंपत्ति (Asset) के रूप में मान्यता नहीं देती. इसलिए सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा दावा भ्रामक है.

दरअसल, भारत में क्रिप्टो को लेकर समय-समय पर नीतिगत चर्चाएं जरूर होती रही हैं, लेकिन अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है जिसमें वित्त मंत्रालय ने RBI और SEBI को क्रिप्टो रेगुलेट करने का निर्देश दिया हो. मौजूदा व्यवस्था में सरकार का फोकस टैक्स और मनी लॉन्ड्रिंग रोकने जैसे अनुपालन उपायों पर है, न कि क्रिप्टो को आधिकारिक मान्यता देने पर.

क्रिप्टो पर भारत का क्या रुख है?

भारत सरकार का रुख अब भी यही है कि वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDAs) या क्रिप्टोकरेंसी की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती, इसलिए इनके प्रभावी नियमन के लिए वैश्विक स्तर पर समन्वित नीति और सहयोग जरूरी है. सरकार ने क्रिप्टो से होने वाली आय पर 30% फ्लैट टैक्स और प्रत्येक लेनदेन पर 1% टीडीएस लागू कर इसे कराधान के दायरे में जरूर लाया है, लेकिन इसे कानूनी मुद्रा या आधिकारिक परिसंपत्ति के रूप में मान्यता नहीं दी है.

वहीं, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लगातार चेतावनी देता रहा है कि क्रिप्टोकरेंसी वित्तीय स्थिरता के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है और इसी वजह से वह इस पर कड़े प्रतिबंध की वकालत करता रहा है.





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