राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर अमेरिकी चुनाव में दखल देने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि बीजिंग उनके राष्ट्रपति पद को कमजोर करना चाहता है और लाखों अमेरिकी वोटरों का रिकॉर्ड हासिल करना चाहता है. चीन ने ट्रंप के आरोपों का नाकार दिया है. चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसने अमेरिकी चुनावों में कभी हस्तक्षेप नहीं किया है और नहीं ऐसा करने की उसकी कोई मंशा है. चीन ने कहा है कि अमेरिकी बेतुके आरोप लगाना बंद करे.
चीन ने ट्रंप के आरोपों को मनगढ़ंत बताया
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा, ‘अमेरिका की ओर से लगाए गए आरोप पूरी तरह से मनगढ़ंत हैं. चीन को बदनाम करने के लिए ऐसे बयान दिए गए हैं. हमें अमेरिकी चुनावों में हस्तक्षेप करने में कोई दिलचस्पी नहीं है और हमने कभी ऐसा नहीं किया है.’ लिन जियान से पूछा गया कि क्या इस घटना का असर सितंबर में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिका पर असर पड़ सकता है. इससे जवाब में उन्होंने कहा, ‘हम अमेरिका से आग्रह करते हैं कि वह अपने चुनावों में चीन को मुद्दा बनाना बंद करे और चीन-अमेरिका संबंध बेहतर हो ऐसा कुछ करें.’
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने मई 2026 में बीजिंग का दौरा किया और शी जिनपिंग से मुलाकात की थी. दोनों सरकारों ने द्विपक्षीय संबंधों को संभालने के लिए एक नया ढांचा अपनाने की बात कही थी. ट्रंप ने जिनपिंग को सितंबर में अमेरिका आने का न्योता दिया था और बीजिंग ने पुष्टि की थी कि शी जिनपिंग ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया है.
ट्रंप ने चीन पर चुनावी डेटा में सेंध लगाने का आरोप लगाया
ट्रंप ने कहा, ‘पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना ने चुनावी डेटा में इतिहास की सबसे बड़ी सेंध लगाई, जिसके परिणामस्वरूप चीन ने अवैध रूप से 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं की फाइलें हासिल कर लीं.’ उन्होंने दावा किया कि इन रिकॉर्ड्स के अनुसार, चुराए गए डेटा में मतदाताओं के नाम, पते, फोन नंबर, राजनीतिक दल की प्राथमिकता और अन्य व्यक्तिगत जानकारियां शामिल थीं, जिनका इस्तेमाल मतदाता पंजीकरण कराने और अन्य कथित अवैध गतिविधियों के लिए किया जा सकता था.
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि इंटेलिजेंस में यह भी आरोप लगाया गया है कि बीजिंग ने बड़ी अमेरिकी कंपनियों के साथ कॉन्टैक्ट का इस्तेमाल करके बिजनेस लीडर्स को अपनी सरकार का विरोध करने के लिए मनाने की कोशिश की.उन्होंने आगे दावा किया कि रिकॉर्ड में कहा गया है कि चीनी सरकार उन अमेरिकी पत्रकारों की पहचान करना चाहती थी जिन्होंने उनकी आलोचना की थी और उन्हें और नकारात्मक रिपोर्ट बनाने के लिए पैसे दिए.
चीन ने करोड़ों वोटर्स का रिकॉर्ड खरीदा: ट्रंप
ट्रंप ने आरोप लगाया कि अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसियों को पहली बार 2020 में पता चला कि 18 राज्यों में करोड़ों वोटर रिकॉर्ड चीन ने खरीदे, चुराए या हैक किए थे. हालांकि, राष्ट्रपति ने यह आरोप भी लगाया कि एजेंसी ने ये जानकारी प्रेसिडेंट या कांग्रेस को नहीं दी.
ट्रंप ने कहा, चीनी सरकार चाहती थी कि अमेरिकी राष्ट्रपति अगला चुनाव हार जाएं. बीजिंग ने चीनी सामान पर उनके सरकार के टैरिफ और उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का विरोध किया था. राष्ट्रपति ने यह भी आरोप लगाया कि 2020 की एफबीआई की रॉ इंटेलिजेंस से पता चला है कि चीनी गतिविधियों में जो बाइडेन के लिए गैर-कानूनी बैलेट बनाने की कोशिश शामिल थी. उन्होंने दावा किया कि चीन की कथित चुनावी गतिविधियों से जुड़ी सीआईए और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी की दर्जनों रिपोर्ट्स को उनकी डेली इंटेलिजेंस ब्रीफिंग से छिपाया गया था.





