हैदराबाद में कालेश्वरम प्रोजेक्ट को लेकर मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और BRS नेताओं के बीच वाकयुद्ध तेज हो गया है. जब पूछा गया कि सरकार गोदावरी में बाढ़ का पानी छोड़ने से क्यों पीछे हट रही है, तो कांग्रेस सरकार ने NDSA रिपोर्ट और बैराज की सुरक्षा को आधार बताया, जबकि BRS नेता हरीश राव ने तुम्मिडिहेट्टी और मेडिगड्डा में पानी की उपलब्धता पर पुराने लेटर और इंजीनियरिंग फैसलों का हवाला देते हुए सरकार के दावे को गलत बताया.
प्रजाभवन में आयोजित की गई पावरपाइंट प्रेजेंटेशन
प्रजा भवन में अपने पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन में, रेवंत रेड्डी ने कालेश्वरम प्रोजेक्ट के कंस्ट्रक्शन में आई कमियों, रीडिज़ाइन और लागत में बढ़ोतरी की कड़ी आलोचना की. उनके मुताबिक, उस समय की सरकार ने रिटायर्ड इंजीनियरों की कमिटी की सिफारिशों को नज़रअंदाज़ किया और प्रोजेक्ट की लागत 38 हज़ार करोड़ रुपये से बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपये हो गई.
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जवाब में, BRS नेताओं, खासकर हरीश राव का कहना है कि कांग्रेस सरकार पानी की उपलब्धता के नाम पर किसानों को गुमराह कर रही है. उन्होंने मीडिया को बताया कि सेंट्रल वॉटर बोर्ड ने साफ कर दिया था कि तुम्मिडीहेट्टी में पानी की कोई उपलब्धता नहीं है, और इसीलिए कालेश्वरम को फिर से डिज़ाइन किया गया.
सरकार बीआरएस की कौनसी मांग का कर रही विरोध
लेटेस्ट खबर यह है कि कांग्रेस सरकार गोदावरी में बाढ़ का पानी ज़्यादा होने पर मोटर चालू करने और पानी पंप करने की BRS की मांग का विरोध कर रही है, और सुरक्षा की चिंता का हवाला दे रही है. सरकार का तर्क है कि NDSA रिपोर्ट में बताया गया है कि मेडिगड्डा और अन्नाराम बैराज की नींव कमज़ोर है, जिससे पूरी मरम्मत के बिना पंपिंग शुरू करना खतरनाक है.
रेवंत रेड्डी ने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि वह विधानसभा में खुली बहस के लिए तैयार हैं, जबकि BRS ने भी घोषणा की कि वह उसी मंच पर जवाब देने के लिए तैयार है. इसके साथ ही, कालेश्वरम का भविष्य सिर्फ इंजीनियरिंग का मुद्दा नहीं बल्कि एक राजनीतिक लड़ाई बन गया है.
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