- खाड़ी क्षेत्र के घटनाक्रमों पर भी महत्वपूर्ण विचार-विमर्श हुआ।
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस वक्त अपने 6 देशों की 11 दिवसीय (5 से 15 जुलाई, 2026 तक) आधिकारिक यात्रा पर हैं, जिसमें से 10 जुलाई तक वे कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान का दौरा कर चुके हैं. अपनी आधिकारिक यात्रा के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इन चारों देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ व्यापक स्तर पर बातचीत की और इस बातचीत में ऊर्जा सहयोग पर विषय को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी गई.
विदेश मंत्री ने खाड़ी देशों के नेतृत्व के साथ की मुलाकात
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार (14 जुलाई, 2026) को विदेश मंत्री एस. जयशंकर की खाड़ी देशों की यात्रा को लेकर प्रेस ब्रीफिंग में कहा, ‘विदेश मंत्री ने खाड़ी इलाके के चार देशों- कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान का दौरा किया है. इन सभी देशों में उन्होंने वहां के शीर्ष नेतृत्व के साथ मुलाकात कर उनके साथ व्यापक स्तर पर बातचीत की.’
उन्होंने कहा, ‘विदेश मंत्री ने चारों देशों के अपने समकक्षों के साथ भी मुलाकात की और द्विपक्षीय व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और निवेश के साथ-साथ कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की. इस बातचीत का सबसे अहम हिस्सा ऊर्जा सहयोग रहा. इसके अलावा, पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रमों पर भी काफी विचार-विमर्श किया गया. साथ ही, सभी पक्षों ने इस मुद्दे पर अपने-अपने नजरिए साझा किए. हालांकि, खाड़ी देशों की यात्रा के दौरान ऊर्जा सुरक्षा चर्चा के प्रमुख विषय रही.’
#WATCH | Delhi: MEA spokesperson Randhir Jaiswal says, “The EAM visited four countries in the Gulf region. In each of these countries- Qatar, Kuwait, Bahrain, and Oman- he had extensive discussions with the leadership, including at the highest level. He also met with his… pic.twitter.com/mKjfUxaV9y
— ANI (@ANI) July 14, 2026
साउथ चाइना सी के मुद्दे पर क्या है भारत का रुख?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साउथ चाइना सी के मुद्दे पर कहा, ‘भारत का रुख जग-जाहिर है. UNCLOS में दर्शाए गए अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक, नेविगेशन और उड़ान की आजादी, समुद्र के अन्य कानूनी उपयोगों और बिना रुकावट के व्यापार को बनाए रखने के महत्व पर जोर देते हैं. हम इस बात की एक बार और पुष्टि करते हैं कि समुद्री विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से और UNCLOS के अनुसार सुलझाया जाना चाहिए.’
उन्होंने कहा, ‘हम यह दोहराते हैं कि 10 साल पहले मध्यस्थता ट्रिब्यूनल की तरफ से सुनाया गया फैसला एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और यह संबंधित पक्षों के बीच विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने का आधार है.’
यह भी पढ़ेंः ईरान वॉर के बीच यूएई ने निकाला होर्मुज का जबरदस्त तोड़, 18 महीने में बनकर होगा तैयार, भारत को क्या फायदा?






