स्पैम कॉल्स पर बड़ा बवाल! Truecaller और TRAI आमने-सामने, जानिए यूजर्स पर क्या पड़ेगा असर?

स्पैम कॉल्स पर बड़ा बवाल! Truecaller और TRAI आमने-सामने, जानिए यूजर्स पर क्या पड़ेगा असर?


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  • चेतावनी रुकने पर धोखाधड़ी बढ़ने की आशंका है।

TRAI-Truecaller: देश में स्पैम कॉल्स तेजी से बढ़ रहा था जिसको लेकर ट्राई नए-नए तरीके अपना रहा था. अब इसी बीच स्पैल कॉल्स पर लगाम लगाने को लेकर ट्राई और ट्रूकॉलर आमने-सामने आ चुके हैं. जी हां, दरअसल, ट्रूकॉलर कई सारी कॉल्स को फर्जी बताने लगाने था जिसमें बैंकिंग कॉल्स भी शामिल थीं. इसके अलावा इन दोनों के आमने-सामने का एक और कारण है जो है कि क्या कॉलर आईडी ऐप्स 140 और 1600 सीरीज से आने वाली कॉल्स को स्पैम बताकर यूजर्स को चेतावनी दे सकते हैं या नहीं. आइए जानते हैं कि यूजर्स पर इसका क्या असर होगा.

क्या है पूरा मामला

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, TRAI चाहता है कि Truecaller, Hiya और Whoscall जैसे कॉलर आईडी ऐप्स 140 और 1600 सीरीज के नंबरों को स्पैम बताना बंद करें. दरअसल, ट्राई का मानना है कि इन नंबरों से आने वाली कॉल्स केवल रजिस्टर्ड कंपनियां, बैंक और दूसरी संस्थाएं मार्केटिंग या सर्विस के लिए इस्तेमाल करती हैं. इसीलिए इन्हें स्पैम कैटेगरी में नहीं रखा जाना चाहिए.

वहीं, दूसरी ओर, Truecaller का कहना है कि अगर ज्यादातर यूजर्स किसी नंबर को लेकर बार-बार शिकायत कर रहे हैं या फिर उन नंबर को ब्लॉक कर रहे हैं तो ऐसे में उन्हें यूजर्स को जानकारी देने का पूरा हक है.

क्या हैं TRAI के नियम

जानकारी के अनुसार, TRAI ने 2024 में एक नया सिस्टम लागू किया था जिसके तहत अलग-अलग तरह की बिजनेस कॉल्स के लिए स्पेशल नंबर सीरीज तय की गई. 140 सीरीज का इस्तेमाल प्रमोशनल या टेलीमार्केटिंग कॉल्स के लिए किया जाता है. वहीं, 1600 सीरीज बैंकिंग, ओटीपी, ट्रांजैक्शन और दूसरी सर्विस कॉल्स के लिए तय की गई थीं.

अब इसके बाद TRAI ने कंपनियों को नॉर्मल 10 अंकों वाले मोबाइल नंबरों की जगह पर इन्हीं विशेष नंबरों का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है जिससे यूजर आसानी से पहचान सकें कि कॉल किसी रजिस्टर्ड संस्था से आई है.

TRAI के प्रस्ताव पर ट्रूकॉलर ने क्या कहा

आपको बता दें कि Truecaller के सीईओ ऋषित झुनझुनवाला ने TRAI के प्रस्ताव की आलोचना की है. उनका कहना है कि कंपनी हर दिन करोड़ों भारतीयों को स्पैम और धोखाधड़ी वाली कॉल्स से बचाने में मदद करती है. ऐसे में अगर ऐप्स को यूजर्स को चेतावनी देने से रोका जाएगा तो इसका सीधा असर यूजर्स पर पड़ेगा और इस सिस्टम का ठग भी फायदा उठा सकते हैं जिससे लोगों के साथ धोखाधड़ी के मामले बढ़ सकते हैं.

यूजर्स पर क्या होगा असर

आपको बता दें कि इस विवाद का सीधा असर करोड़ों भारतीय मोबाइल यूजर्स पर देखने को मिल सकता है. अगर कॉलर आईडी ऐप्स को चेतावनी दिखाने की परमिशन नहीं मिली तो ये पहचानना मुश्किल हो जाएगा कि ये कॉल्स किसी रजिस्टर्ड कंपनी की हैं या फिर किसी ठग की है. हालांकि, सरकार की ओर से इस पर अभी अंतिम फैसला आना बाकी है.

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