- एआई चैटबॉट अकेलेपन से जूझ रहे लोगों की जीवनरेखा बन सकते हैं।
- येल साइकोलॉजिस्ट ब्लूम ने इसे लाखों लोगों के लिए मददगार बताया है।
- हालांकि, अत्यधिक निर्भरता मानवीय संबंधों को खतरे में डाल सकती है।
AI For Lonely People: चैटजीपीटी, गूगल जेमिनी और ग्रोक जैसे एआई चैटबॉट्स अब सिर्फ प्रोडक्टिविटी टूल्स तक सीमित नहीं रहे हैं. कई लोगों के लिए ये अध्यापक, असिस्टेंट, दोस्त और यहां तक कि पार्टनर के तौर पर भी काम कर रहे हैं. अब येल यूनिवर्सिटी के साइकोलॉजिस्ट पॉल ब्लूम ने एआई असिस्टेंट को लेकर बड़ी बात कही है. उन्होंने कहा कि अकेलेपन से जूझ रहे लोगों के लिए एआई एक लाइफलाइन बन सकती है. उनका मानना है कि एआई कंपैनियन दुनियाभर के लाखों लोगों का अकेलापन का दर्द दूर कर सकते हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी चेताया कि इन पर ज्यादा निर्भर होने से इंसानी रिश्ते खतरे में आ सकते हैं और लोगों के लिए असल दुनिया में कनेक्शन बनाना मुश्किल हो जाएगा.
“अकेले लोगों के लिए वरदान है एआई”
ब्लूम ने कहा कि एआई चैटबॉट्स ऐसे लोगों के लिए बहुत काम की चीज हो सकती है, जिनके पास बातें करने के लिए कोई नहीं है. केयर होम्स में रह रहे बुजुर्ग या ऐसे लोग, जिनका परिवार और दोस्तों के साथ संपर्क टूट चुका है, उनके लिए यह मददगार साबित हो सकता है. अगर चैटजीपीटी, क्लॉड और जेमिनी के फ्यूचर वर्जन में कंपैनियनशिप मिलती है और ये अकेलेपन को कम कर सके तो यह शानदार और एक बड़ी बीमारी की इलाज भी होगा. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि चैटबॉट घर में यूज होने वाले अप्लायंसेस की तरह है. यह सिर्फ एक मशीन है, जो अपना काम करती है. भले ही एआई से बातचीत एकदम असली जैसी फील हो, लेकिन चैटबॉट उस व्यक्ति की केयर नहीं कर सकता, जिससे वह बात कर रहा है.
इमोशनल सपोर्ट के लिए एआई
चैटबॉट की लिमिटेशन के बावजूद ब्लूम का मानना है कि बहुत से एडल्ट मुश्किल समय में एआई चैटबॉट पर ही आते हैं और उससे अपनी प्रॉब्लम्स शेयर करते हैं. एआई कॉन्सिपरेंसी थ्योरीज या एक्स्ट्रीम व्यूज को प्रोत्साहित नहीं करती बल्कि उसके जवाब शांत और सामान्य होते हैं.
खतरों से भी सावधान रहने की जरूर
एआई चैटबॉट पर निर्भरता खतरनाक हो सकती है और ब्लूम भी इस बात को मानते हैं. उनका कहना है कि एआई कंपैनियन के साथ के अपने खतरे हैं. लोग बातचीत करते समय टोक देते हैं, लेकिन चैटबॉट ऐसा नहीं करते. न ही वो बातचीत के बीच में बोलते हैं और न ही यूजर्स को यह बताते हैं कि उन्होंने लाइन क्रॉस कर दी है. इन पर ज्यादा समय बिताना खतरनाक हो सकता है. यह आदत लगने पर असली लोगों से बातचीत करना काफी मुश्किल बन जाएगा.
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