एअर इंडिया का विमान कैसे नीचे आया, 36000 फीट की ऊंचाई पर क्या हुआ था? पूरी कहानी

एअर इंडिया का विमान कैसे नीचे आया, 36000 फीट की ऊंचाई पर क्या हुआ था? पूरी कहानी


फुकेत से दिल्ली आ रही एअर इंडिया (Air India) की फ्लाइट AI2379 में 4 अगस्त को हुई घटना की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है. शुरुआती टर्बुलेंस की कहानी अब कई तकनीकी और ऑपरेशनल सवालों में बदल गई है. इसी बीच कैप्टन के कन्फर्मेटरी टेस्ट में गांजा (Marijuana) की पुष्टि होने की खबर भी सामने आई है. हालांकि जांच एजेंसी ने चेताया है कि किसी एक जानकारी के आधार पर घटना का कारण तय नहीं किया जा सकता. 

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 11 अगस्त को कहा कि विमान ने cruise के दौरान करीब 300 फीट की अचानक एल्टीट्यूड वेरिएशन का सामना किया. विमान बाद में स्थिर हुआ और दिल्ली में सुरक्षित उतरा. इस घटना में 20 यात्री और चार केबिन क्रू घायल हुए. अब यही कुछ सेकंड पूरी जांच का केंद्र हैं क्योंकि सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि विमान नीचे क्यों आया. असली सवाल यह है कि विमान के नीचे आने से पहले क्या हुआ था और उसके बाद क्या हुआ?

एअर इंडिया ने शुरुआती बयान में घटना को brief in-flight turbulence बताया था जिसके कारण विमान की ऊंचाई में momentary change आया, लेकिन उसी दिन बाद में भाषा बदल गई. बाद के बयान में ‘turbulence’ शब्द हट गया और घटना को “sudden loss of altitude during cruise” यानी cruise के दौरान अचानक ऊंचाई कम होने के रूप में बताया गया. यहीं से मामला सिर्फ मौसम की स्थिति से आगे बढ़कर विमान के टेक्निकल सिस्टम की जांच तक पहुंच गया.

विमान में उस वक्त क्या हुआ?
विमान की altitude में अचानक बदलाव का असर सबसे ज्यादा केबिन में दिखाई दिया. जो यात्री सीट बेल्ट लगाए हुए नहीं थे वे अपनी सीटों से उछल गए. केबिन क्रू के सदस्य उस समय यात्रियों की सेवा में खड़े थे. अचानक हुए बदलाव में उन्हें संभलने का मौका नहीं मिला. शुरुआत में 13 यात्रियों और 4 केबिन क्रू के घायल होने की जानकारी सामने आई थी. बाद में यह आंकड़ा बढ़ा. 11 अगस्त को नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर बताया कि 20 यात्री और 4 केबिन क्रू घायल हुए हैं. विमान में 6 केबिन क्रू थे यानी 4 को चोट आई.

यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि घटना की शुरुआती रिपोर्टों में 17 घायलों का आंकड़ा चल रहा था. अब सरकारी तौर पर उपलब्ध ताजा आंकड़ा 24 घायल लोगों का है. इसी के साथ सूत्रों के हवाले से पायलट इन कमांड के marijuana के सेवन की बात भी निकल के आई है यानि कि पायलट फ्लाइट चलाने के दौरान अपने senses में था या नहीं इस पर भी सवाल है. 

सूत्रों के मुताबिक AI 2379 की कैबिन क्रू ने एयरलाइन में शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत में पायलट-इन-कमांड (PIC) के विमान में कथित तौर पर नशे में या असामान्य व्यवहार करने की बात कही गई है. सूत्रों का यह भी दावा है कि युवा को-पायलट ने अकेले विमान को संभाला उसे स्थिर किया और फिर सुरक्षित तरीके से गंतव्य तक लैंड कराया.

तीनों हाइड्रॉलिक सिस्टम फेल 
जांच में सबसे महत्वपूर्ण दावों में से एक Airline Pilot Association of India यानी ALPA India की ओर से आया है. संगठन के अध्यक्ष कैप्टन सैम थॉमस ने कहा है कि विमान के पायलट-इन-कमांड ने झारसुगुड़ा इलाके में पहुंचने के दौरान तीनों हाइड्रॉलिक सिस्टम के फेल होने को महसूस किया. उनके मुताबिक स्थिति को संभालने के लिए कैप्टन ने co-pilot से विमान की nose नीचे करने को कहा. इससे विमान करीब 300 फीट नीचे गया. ALPA के मुताबिक इसी altitude dip से negative-G स्थिति बनी और cabin में मौजूद यात्री और crew ऊपर की तरफ उछल गए.

उन्होंने यह भी दावा किया कि तीनों hydraulic systems का एक साथ fail होना दुर्लभ स्थिति है और cockpit crew की तत्काल कार्रवाई ने स्थिति को नियंत्रण में रखने में मदद की. सबसे महत्वपूर्ण बात ALPA India का दावा है AAIB की अंतिम finding नहीं. यही वजह है कि जांच एजेंसी के डेटा आने तक इसे established fact नहीं माना जा सकता.

हाइड्रॉलिक सिस्टम आखिर करता क्या है?
Airbus A320 में तीन हाइड्रोलिक सिस्टम होते हैं. इन्हें आम तौर पर ग्रीन, ब्लू और यलो सिस्टम के रूप में पहचाना जाता है. इनका काम विमान के कई फ्लाइट कंट्रोल सरफेस और दूसरे महत्वपूर्ण सिस्टम को हाइड्रोलिक पॉवर उपलब्ध कराना है. सरल भाषा में समझें तो पायलट जब विमान को ऊपर, नीचे या किसी दिशा में नियंत्रित करता है तो कॉकपिट में उसके इनपुट्स को एयरक्राफ्ट के फ्लाइट-कंट्रोल सिस्टम के जरिए कंट्रोल सरफेस तक पहुंचाया जाता है. हाइड्रोलिक पॉवर इन सरफेस को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

तीन अलग systems रखने का मकसद redundancy है यानी एक system में समस्या आए तो दूसरे systems aircraft को नियंत्रित रखने में मदद कर सके. इसीलिए अगर तीनों में एक साथ गंभीर समस्या की बात सामने आती है तो यह जांच के लिए बड़ा technical question बन जाता है.

क्या है दूसरी संभावना 
यही वह बिंदु है जहां AI2379 की कहानी तकनीकी रूप से ज्यादा जटिल हो जाती है. मान लीजिए विमान पहले किसी कारण से तेजी से नीचे गया. इस दौरान aircraft की movement का असर hydraulic reservoirs में मौजूद fluid पर पड़ा. कुछ परिस्थितियों में fluid की स्थिति बदलने से sensors को कुछ समय के लिए pressure या fluid level सामान्य से अलग दिखाई दे सकता है. इससे warning आ सकती है। अगर AI2379 में ऐसा हुआ तो hydraulic warnings विमान के नीचे आने की वजह नहीं बल्कि उसका परिणाम हो सकती हैं. पहले hydraulic failure हुआ और उसके बाद aircraft को नीचे लाया गया. यही वह सवाल है जिसे FDR, CVR और aircraft technical examination से सुलझाना होगा.

13 warnings का मतलब 13 failures नहीं
यह तकनीकी तौर पर एक महत्वपूर्ण अंतर है. विमान में अगर एक बड़ी घटना होती है तो उसके असर से कई systems एक साथ warning दे सकते हैं. इसलिए PFR में 13 entries होने का मतलब यह नहीं है कि aircraft में 13 अलग-अलग independent failures हुए। एक ही मूल घटना से कई warnings trigger हो सकती हैं. जांचकर्ताओं को देखना होगा कि इन warnings में कौन-सी primary event थी और कौन-सी secondary consequence। यही sequencing इस मामले में सबसे अहम है.

04:02 में छिपा है राज़ ?
तकनीकी रिकॉर्ड में समय को लेकर भी भ्रम सामने आया है. Aircraft records में aviation industry आम तौर पर UTC यानी Coordinated Universal Time का इस्तेमाल करती है. भारत UTC से साढ़े पांच घंटे आगे है. इसलिए अगर किसी technical record में 04:02 UTC दर्ज है तो भारत में वह समय सुबह 9:32 बजे होगा यानी 04:02 का अर्थ भारत में सुबह चार बजकर दो मिनट नहीं है. यह भारतीय समय के मुताबिक करीब 9:32 बजे बैठता है और यही वह समय है जिसे घटना के दौरान दर्ज technical warnings के साथ जोड़ा जा रहा है.

सामने आया पायलट का ड्रग टेस्ट 
AI2379 की जांच में तकनीकी पहलू के साथ medical angle भी जुड़ गया है. घटना के बाद दोनों pilots का psychoactive substance screening test किया गया. शुरुआती जानकारी के मुताबिक co-pilot की screening में ऐसी समस्या नहीं मिली. Pilot-in-Command यानी captain की initial screening में ऐसा संकेत आया, जिसके बाद sample को confirmatory laboratory test के लिए भेजा गया. सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि confirmatory laboratory test में captain के sample में marijuana positive पाया गया. दोनों pilots को flying roster से हटाया जा चुका है. 

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 11 अगस्त को कहा कि AAIB सभी टेक्निकल, ऑपरेशनल, मेडिकल और ह्यूमन फैक्टर एविडेंस को एक साथ देख रहा है. जांच में एयरक्राफ्ट और उसके सिस्टम की एग्जामिनेशन, रिकॉर्डेड फ्लाइट डेटा, ऑपरेशनल और मेंटेनेंस रिकॉर्ड, मेडिकल इंफॉर्मेशन और संबंधित लोगों के interviews शामिल हैं. सरकार ने स्पष्ट कहा है कि जांच पूरी होने से पहले किसी isolated piece of information से घटना के कारण के बारे में निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए यानी न तो hydraulic failure को अभी final cause माना जा सकता है और न pilot के medical test को.

Black Box बताएगा सच
अब सबकी नजरें Flight Data Recorder और Cockpit Voice Recorder पर हैं. FDR से जांचकर्ता देख सकते हैं कि उस वक्त aircraft की altitude, speed, pitch, control inputs और दूसरे flight parameters में क्या बदलाव आया. CVR से cockpit में हुई बातचीत और pilots की प्रतिक्रिया की टाइमलाइन तैयार करने में मदद मिलेगी.

AAIB के साथ एयरबस और फ्रांस की BEA भी जांच में मदद कर रहे हैं. 11 अगस्त के नागरिक उड्डयन मंत्रालय के बयान के मुताबिक AAIB ने इंटरनेशनल एविएशन इन्वेस्टिगेशन प्रोटोकॉल के तहत जांच अपने हाथ में ली है. फ्रांस की BEA Airbus के technical representatives AAIB को टेक्निकल असिस्टेंट दे रहे हैं. यह इंटरनेशनल एविएशन इन्वेस्टिगेशन फ्रेमवर्क का हिस्सा है. जांच में एयरक्राफ्ट सिस्टम, फ्लाइट डेटा, मेंटेनेंस रिकॉर्ड, मेडिकल एविडेंस और ह्यूमन फैक्टर्स सभी को देखा जा रहा है.

यात्रियों के लिए सीख
AI2379 की घटना एक पुरानी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण aviation safety सलाह को फिर सामने लाती है. सीट पर बैठे हों तो seat belt बांधे रखें, भले ही seat-belt sign बंद हो. विमान हजारों फीट की ऊंचाई पर सामान्य cruise में हो सकता है, लेकिन कुछ सेकंड में altitude या aircraft movement में बदलाव आ सकता है. AI2379 में भी cabin में सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ा जो उस वक्त अपनी सीट पर नहीं थे या seat belt नहीं लगाए हुए थे. घटना कुछ सेकंड की थी लेकिन उसके पीछे का जवाब अब कई रिकॉर्ड, technical evidence और cockpit data को जोड़कर तलाशा जा रहा है. 

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