Drip Irrigation System Subsidy: खेती-किसानी में सिंचाई बेहद जरूरी चीज होती है. कई लोग आज भी पुराने पारंपरिक तरीकों से सिंचाई करते हैं. लेकिन कम होते वाटर लेवल के चलते इस वक्त पुराने तरीकों से सिंचाई करना अब काफी मुश्किल होता नजर आ रहा है. खुले खेतों में पानी बहाने से न केवल लाखों लीटर पानी बर्बाद होता है. बल्कि खाद और बिजली की भी भारी खपत होती है. किसानों की इसी बड़ी समस्या का एक आधुनिक और टिकाऊ समाधान लेकर आई है माइक्रो इरिगेशन यानी ड्रिप सिंचाई तकनीक.
इस तकनीक के जरिए पौधों की जड़ों में बूंद-बूंद पानी और खाद पहुंचाई जाती है. जिससे पानी की बचत के साथ-साथ फसल की क्वालिटी और पैदावार दोनों में काफी सुधार होता है. आपको बता दें ड्रिप सिस्टम लगाने का खर्च खुद किसानों को अकेले नहीं उठाना है. सरकार इसके लिए लाखों रुपये की बंपर सब्सिडी दे रही है. चलिए आपको बताते हैं कितनी फायदेमंद है यह सिंचाई तकनीक और किसान कैसे इसके लिए सरकार से मिलने वाले लाभ का फायदा उठा सकते हैं.
किसानों के लिए फायदेमंद ड्रिप सिंचाई
ड्रिप सिंचाई का तरीका आज के समय काफी मुनाफे वाला साबित हो रहा है. पहले के पुराने सिंचाई तरीकों के सामने यह तरीका काफी सही और सस्ता है. इस तरीके में पाइप्स के जरिए पानी और घुलने वाली खाद सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंच जाती है. इससे खेत में पानी बेवजह बहकर बर्बाद नहीं होता और खरपतवार भी नहीं उगती है. अगर पौधों को उनकी जरूरत के हिसाब से सही समय पर पानी और पोषण मिलता है तो जाहिर तौर पर उनकी ग्रोथ बेहतर होती है और फसल ज्यादा मजबूत तैयार होती है.
कृषि जानकारों के मुताबिक ड्रिप सिंचाई सिस्टम अपनाने से तकरीबन 60 से 70 प्रतिशत तक पानी की बचत हो सकती है. इसके साथ ही बिजली की खपत कम होती है और खाद और कीटनाशक पर होने वाला खर्च भी घट जाता है. यानी कम लागत में किसान अच्छा उत्पादन हासिल कर सकते हैं. कई फसलों में तो इस तकनीक के इस्तेमाल उत्पादन में 30 से 40 प्रतिशत तक का इजाफा भी देखने को मिलता है.
यह भी पढ़ें: बाढ़ का मुआवजा लेने के लिए कितने दिन का समय देती है सरकार, जानें नियम
सरकार दे रही लाखों की मदद
ड्रिप सिंचाई को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और पर ड्रॉप मोर क्रॉप अभियान के तहत किसानों को अच्छी-खासी सब्सिडी दे रही है. ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम लगाने पर कुल लागत का करीब 80 से 90 प्रतिशत तक खर्च सरकार उठाती है. इससे किसानों पर शुरुआती निवेश का बोझ काफी कम हो जाता है.
मसलन अगर किसी खेत में ड्रिप सिस्टम लगाने का खर्च 1 से 1.5 लाख रुपये आता है. तो छोटे और सीमांत किसानों को सिर्फ 10 से 20 प्रतिशत रकम ही खुद देनी पड़ती है. बाकी राशि सरकार की ओर से मंजूर कंपनी को सीधे भेज दी जाती है.
बड़े किसानों को भी 75 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी का लाभ मिलता है. इस योजना का मकसद यही है कि ज्यादा से ज्यादा किसान कम खर्च में आधुनिक सिंचाई तकनीक अपनाएं पानी की बचत करें और खेती से बेहतर मुनाफा कमा सकें.

योजना का लाभ कैसे उठाएं?
अपने खेत में ड्रिप सिंचाई सिस्टम लगवाने के लिए आपको पास कुछ डाॅक्यूमेंट होने जरूरी है. इनमें बात की जाए तो आधार कार्ड, बैंक पासबुक, पासपोर्ट साइज फोटो, मोबाइल नंबर और खेती की जमीन से जुड़े डाॅक्यूमेंट्स जैसे खसरा या खतौनी होना जरूरी है. आप इन डाॅक्यूमेंट्स के साथ किसान अपने राज्य के उद्यानिकी विभाग या कृषि विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं.
अगर ऑनलाइन अप्लाई करने में कोई दिक्कत आ रही है तो फिर आप नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर या जिला उद्यानिकी कार्यालय जाकर भी रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है. आवेदन जमा होने के बाद विभाग के अधिकारी खेत का निरीक्षण करते हैं. मंजूरी मिलने पर अधिकृत कंपनी आपके खेत में ड्रिप सिंचाई सिस्टम लगाती है. इसके बाद तय नियमों के अनुसार सब्सिडी की राशि जारी कर दी जाती है.
यह भी पढ़ें: मध्यप्रदेश-राजस्थान के किसान ध्यान दें, इन फसलों में सबसे ज्यादा मुनाफा






