- AIMIM ने वोटर पंजीकरण हेतु PRC सर्टिफिकेट का प्रस्ताव दिया।
- यह गरीबों, अल्पसंख्यकों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया आसान करेगा।
- मुख्य सचिव से मिलकर, प्रतिनिधियों ने PRC लागू करने कहा।
- कर्नाटक में PRC जारी है; मौजूदा सरकारी डेटा उपलब्ध।
तेलंगाना में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR-2026) प्रोसेस में वोटर्स के रजिस्ट्रेशन और वेरिफिकेशन को आसान बनाने के लिए AIMIM चीफ और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी के प्रपोजल पर चर्चा शुरू हो गई है. इसी सिलसिले में फहीम कुरैशी के साथ प्रतिनिधियों के एक ग्रुप ने तेलंगाना के चीफ सेक्रेटरी (CS) से मुलाकात की और राज्य सरकार से वोटर्स को PRC (पॉपुलेशन रजिस्टर सर्टिफिकेट) या फैमिली रजिस्टर सर्टिफिकेट जारी करने की रिक्वेस्ट की.
उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य सरकार आर्टिकल 162 के तहत स्पेशल ऑर्डर जारी करके इस सिस्टम को लागू कर सकती है. प्रतिनिधियों ने कहा कि यह SIR की फाइनल लिस्ट में एलिजिबल वोटर्स के नाम रजिस्टर करने में फायदेमंद होगा.
PRC सर्टिफिकेट की मांग क्यों कर रहे ओवैसी?
ओवैसी मानते रहे हैं कि वोटर लिस्ट के रिवीजन की प्रक्रिया में गरीबों, अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्ग (BC), अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) को मुश्किलों का सामना नहीं करना चाहिए. ऐसा लगता है कि यह प्रपोजल भी उसी सिलसिले में आया है.
I met @TelanganaCS along with @FaheemQureshinc and demanded that @revanth_anumula government must consider issuing PRC or Family Register Certificate to electors of Telangana in the ongoing SIR in Telangana under Article 162
If @revanth_anumula accepts it will be beneficial to…— Asaduddin Owaisi (@asadowaisi) July 10, 2026
प्रतिनिधियों के मुताबिक, कर्नाटक सरकार पहले से ही कर्नाटक ऑल सर्विसेज एक्ट-2011 के तहत PRC सर्टिफिकेट जारी कर रही है. उनका मानना है कि अगर तेलंगाना में भी ऐसा ही सिस्टम लागू किया जाता है, तो घर और परिवार की जानकारी को वेरिफाई करने का प्रोसेस आसान हो जाएगा.
AIMIM ने किन-किन रिकॉर्ड की दिलाई याद
प्रतिनिधियों ने याद दिलाया कि तेलंगाना सरकार के पास पहले से ही कई ऑफिशियल डेटाबेस जैसे कॉम्प्रिहेंसिव फैमिली सर्वे, 2024-25 सोशियो-इकोनॉमिक और जाति जनगणना डेटा, फूड सिक्योरिटी कार्ड की जानकारी, म्युनिसिपल टैक्स रिकॉर्ड और एजुकेशनल इंस्टिट्यूशन रिकॉर्ड मौजूद हैं.
कहा गया कि अगर इस जानकारी के आधार पर PRC या फैमिली रजिस्टर सर्टिफिकेट जारी किया जाता है, तो SIR प्रोसेस में लोगों को होने वाली मुश्किलें कम होने की संभावना है. राज्य सरकार इस प्रस्ताव पर क्या फैसला लेगी, यह अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है.






