धान छोड़कर इन 5 चीजों की करें खेती, कम पानी में भी बढ़िया होगी पैदावार

धान छोड़कर इन 5 चीजों की करें खेती, कम पानी में भी बढ़िया होगी पैदावार


इस लिस्ट में पहला नाम आता है बाजरे का. मोटे अनाजों में शामिल बाजरा कम पानी और सूखी मिट्टी में भी आसानी से लहलहा उठता है. इसकी खेती में लागत बेहद कम आती है और मार्केट में आजकल इसकी डिमांड बहुत तेजी से बढ़ रही है. हेल्थ कॉन्शियस लोगों के बीच इसकी पूछ परख बढ़ने से किसानों को इसके अच्छे दाम मिल रहे हैं.

दूसरा बेहतरीन ऑप्शन है मूंग की खेती. मूंग की फसल बहुत कम दिनों में यानी लगभग साठ से पैंसठ दिन के अंदर पककर तैयार हो जाती है. इसे बहुत ही कम सिंचाई की जरूरत होती है और यह मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को भी बढ़ाती है. धान के मुकाबले इसमें आधी से भी कम मेहनत और पानी लगता है.

दूसरा बेहतरीन ऑप्शन है मूंग की खेती. मूंग की फसल बहुत कम दिनों में यानी लगभग साठ से पैंसठ दिन के अंदर पककर तैयार हो जाती है. इसे बहुत ही कम सिंचाई की जरूरत होती है और यह मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को भी बढ़ाती है. धान के मुकाबले इसमें आधी से भी कम मेहनत और पानी लगता है.

तीसरे नंबर पर आप तिलहन फसलों में सरसों या सूरजमुखी को चुन सकते हैं. खासकर सूरजमुखी एक ऐसी फसल है जो हर तरह के मौसम में ढल जाती है. इसे बहुत ज्यादा पानी नहीं चाहिए होता और इसके बीजों से निकलने वाले तेल की मार्केट वैल्यू हमेशा हाई रहती है. कम लागत में यह आपको बढ़िया प्रॉफिट दे सकती है.

तीसरे नंबर पर आप तिलहन फसलों में सरसों या सूरजमुखी को चुन सकते हैं. खासकर सूरजमुखी एक ऐसी फसल है जो हर तरह के मौसम में ढल जाती है. इसे बहुत ज्यादा पानी नहीं चाहिए होता और इसके बीजों से निकलने वाले तेल की मार्केट वैल्यू हमेशा हाई रहती है. कम लागत में यह आपको बढ़िया प्रॉफिट दे सकती है.

चौथे ऑप्शन में आता है मक्का जिसकी खेती आज के समय में काफी मुनाफा देती है. मक्के को धान के मुकाबले बेहद कम पानी की जरूरत होती है और इसे साल में कई बार उगाया जा सकता है. पोल्ट्री फीड से लेकर फूड इंडस्ट्री तक में मक्के की भारी डिमांड है जिससे इसकी बिक्री की कोई टेंशन नहीं रहती.

चौथे ऑप्शन में आता है मक्का जिसकी खेती आज के समय में काफी मुनाफा देती है. मक्के को धान के मुकाबले बेहद कम पानी की जरूरत होती है और इसे साल में कई बार उगाया जा सकता है. पोल्ट्री फीड से लेकर फूड इंडस्ट्री तक में मक्के की भारी डिमांड है जिससे इसकी बिक्री की कोई टेंशन नहीं रहती.

पांचवीं चीज़ है अरहर यानी तुअर की दाल की खेती. अरहर की जड़ें जमीन में काफी गहरी जाती हैं जिससे यह जमीन के नीचे की नमी को खुद सोख लेती हैं. इसे अलग से बहुत ज्यादा पानी देने की जरूरत बिल्कुल नहीं पड़ती. दालों के बढ़ते दामों के बीच अरहर की खेती किसानों के लिए एक सॉलिड कमाई का जरिया है.

पांचवीं चीज़ है अरहर यानी तुअर की दाल की खेती. अरहर की जड़ें जमीन में काफी गहरी जाती हैं जिससे यह जमीन के नीचे की नमी को खुद सोख लेती हैं. इसे अलग से बहुत ज्यादा पानी देने की जरूरत बिल्कुल नहीं पड़ती. दालों के बढ़ते दामों के बीच अरहर की खेती किसानों के लिए एक सॉलिड कमाई का जरिया है.

अगर आप भी इस सीजन में पानी की कमी और बिजली के बिल से बचना चाहते हैं तो इन पांच चीजों को ट्राई जरूर कर सकते हैं. खेती में कुछ हटकर करना न सिर्फ आपकी जेब को भारी रखेगा बल्कि पर्यावरण के लिए भी अच्छा रहेगा.

अगर आप भी इस सीजन में पानी की कमी और बिजली के बिल से बचना चाहते हैं तो इन पांच चीजों को ट्राई जरूर कर सकते हैं. खेती में कुछ हटकर करना न सिर्फ आपकी जेब को भारी रखेगा बल्कि पर्यावरण के लिए भी अच्छा रहेगा.

Published at : 10 Jul 2026 12:37 PM (IST)

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