Investment Plan: पहले के समय में लोग प्रॉपर्टी में ज्यादा निवेश किया करते थे. हमारे दादा- परदादा और पिताजी तक की जनरेशन ने प्रॉपर्टी में काफी निवेश किया है और हमें भी यही सलाह देते आए हैं. लेकिन वक्त के साथ बहुत कुछ बदल गया है अब युवाओं के सोचने- समझने का अंदाज भी बदल गया है. ऐसे में उनके निवेश के तरीके बदलना भी लाजिमी है. इन दिनों युवा वर्ग प्रॉपर्टी में नहीं बल्कि कहीं और निवेश करने का प्लान बना रहा है. आइये जानते हैं.
घर खरीदना नहीं किराये पर रहना है अच्छा
भारत में अब बड़ी संख्या में मिलेनियल्स और Gen Z घर खरीदने की जगह किराये पर रहना पसंद कर रहे हैं. रियल एस्टेट प्लेटफॉर्म NoBroker की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 46% किरायेदार लंबे समय तक किराए के घर में रहना चाहते हैं. 25-34 साल के 53% और 35-44 साल के 48% लोगों ने बताया है कि वो फिलहाल घर खरीदने की जगह पर किराये पर घर लेने को ही बेहतर मान रहे हैं.
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ये है वजह
युवा वर्ग की इस नई सोच का ससे बड़ा कारण होम लोन की बढ़ती EMI है. कई बड़े शहरों में घर की मंथली EMI, उसी तरह के घर के किराये से दो गुना या उससे भी ज्यादा हो गई है. ऐसे में युवा घर खरीदने के बजाय अपनी सेविंग म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार और दूसरे निवेश ऑप्शंस में लगाना पसंद कर रहे हैं.
इस रिपोर्ट के मुताबिक गुड़गांव, बेंगलुरु, हैदराबाद और मुंबई जैसे शहरों में घर खरीदना पहले के मुकाबले काफी महंगा हो गया है. इसलिए कई लोग लंबी अवधि के होम लोन लेने की जगह किराये पर रहकर फाइनेंशियल फ्रीडम बनाए रखना चाहते हैं.
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बेहतर लाइफस्टाइल चाहते हैं यंगस्टर्स
युवाओं की सोच भी बदल रही है. अब वो सिर्फ इसलिए किराये पर नहीं रह रहे क्योंकि वो घर नहीं खरीद सकते, बल्कि वो बेहतर जीवनशैली चाहते हैं. उनकी पसंद अब बड़े घर, गेटेड सोसाइटी, फुली फर्निश्ड फ्लैट और प्रीमियम आवासीय परियोजनाएं बन गई हैं. बार-बार जॉब स्विच करना, हाइब्रिड वर्क, बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतें और फाइनेंशियल प्लानिंग को लेकर बढ़ती जागरूकता भी इस बदलाव की बड़ी वजह हैं.
बढ़ रहा है किराया
कई युवा तो तब तक घर नहीं खरीदना चाहते जब तक वो तय ना कर लें कि उन्हें लंबे समय के लिए या हमेशा के लिए कहां रहना है. इसकी वजह से किराये में भी लगातार बढ़ोतरी होती जा रही है. मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में किराये सबसे तेजी से बढ़ रहे हैं. इसके बाद चेन्नई और बेंगलुरु में भी तेजी से किराया बढ़ रहा है. सीधी बात ये है कि अब कई युवाओं के लिए किराये पर रहना मजबूरी नहीं, बल्कि एक सोच-समझकर लिया गया फाइनेंशियल डिसीजन बन गया है.






