पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने के बीच कांग्रेस ने अब देशभर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में अपनी छात्र इकाई नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) को मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है. पार्टी ने हर सरकारी और निजी कॉलेज, विश्वविद्यालय और शैक्षणिक संस्थान तक पहुंचने का रोडमैप तैयार किया है. इसके तहत NSUI देशभर में संगठनात्मक चुनाव कराएगी.
इस बारे में जानकारी देते हुए NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने बताया कि संगठन का उद्देश्य छात्रों की भागीदारी बढ़ाना और लोकतांत्रिक तरीके से नेतृत्व का चयन करना है. उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों में बीजेपी और आरएसएस ने शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है. इसी वजह से NSUI कैंपस स्तर पर चुनाव कराकर छात्रों को अपना प्रतिनिधि चुनने का मौका देगी.
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विनोद जाखड़ उम्मीदवार को लेकर क्या कहा?
विनोद जाखड़ ने कहा कि जो उम्मीदवार कॉलेज या विश्वविद्यालय स्तर का चुनाव जीतेगा, वही NSUI का आधिकारिक प्रतिनिधि बनेगा. आगे चलकर इन्हीं प्रतिनिधियों में से प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों का भी चयन किया जाएगा. उनका कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का मकसद छात्रों के हितों की रक्षा करना और संगठन को नीचे से ऊपर तक लोकतांत्रिक तरीके से मजबूत करना है. NSUI ने संगठनात्मक चुनाव के लिए तीन मुख्य सिद्धांत तय किए हैं. पहला, चुनाव सभी छात्रों के लिए खुले होंगे. दूसरा, सदस्यता और चुनाव प्रक्रिया सभी के लिए आसान और सुलभ होगी. तीसरा, पूरी चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखी जाएगी.
चुनाव कितने चरण में होंगे?
चुनाव दो चरणों में कराए जाएंगे. पहले चरण में सभी राज्यों में सदस्यता अभियान चलाया जाएगा. इसके बाद कॉलेज और विश्वविद्यालय अध्यक्षों का चुनाव होगा. दूसरे चरण में चुने गए कॉलेज और विश्वविद्यालय अध्यक्ष जिला अध्यक्ष, जिला समिति, प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश समिति का चुनाव करेंगे. सदस्य बनने के लिए कुछ शर्तें भी तय की गई हैं. आवेदक का भारतीय नागरिक होना जरूरी होगा. उसे भारत के संविधान में आस्था रखनी होगी और वह किसी मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान का छात्र होना चाहिए. सदस्यता के लिए आयु सीमा 16 से 27 वर्ष निर्धारित की गई है.
NSUI का सदस्यता शुल्क क्या है?
आवेदन के साथ कॉलेज का पहचान पत्र और आधार कार्ड जमा करना अनिवार्य होगा. NSUI ने सदस्यता शुल्क तीन साल के लिए 45 रुपये तय किया है. कांग्रेस का कहना है कि इस नई व्यवस्था के जरिए संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत किया जाएगा और छात्रों को सीधे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर मिलेगा.
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