एकलौता मंदिर जहां विराजे हैं दो मुख वाले नंदी, शिव ने अमतकथा सुनाने से पहले यहां नंदी को त्यागा

एकलौता मंदिर जहां विराजे हैं दो मुख वाले नंदी, शिव ने अमतकथा सुनाने से पहले यहां नंदी को त्यागा


Amarnath Yatra 2026 Do Mukhi Nandi Mandir: धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव जब माँ पार्वती (गौरा) को अमरकथा सुनने के लिए आए तो सबसे पहले उन्होंने पहलगाम में ही नंदी का त्याग किया था. नंदी भोलेनाथ को बहुत प्रिय भी है इसलिए हर शिव लिंग के पास नंदी विराजमान होते है.

कहा जाता है भोलेनाथ के दर्शन तब तक अधूरे है जबतक नंदी के दर्शन न हो जाय. इसी लिए बाबा बर्फानी के दर्शन के बाद या पहले ममलेश्वर मंदिर के दर्शन जरूर करता है. इस मंदिर में नंदी के दो मुख है और दो मुख के नंदी सिर्फ इसी मंदिर में स्थापित है. 

बताया जाता है कि ये मंदिर कई सौ साल पुराना है और और जो नंदी इस मंदिर में जो दो मुख वाले नंदी स्थापित है वो करीब कई सौ साल पहले ज़मीन से निकले थे जिसके बाद उन्हें यहाँ स्थापित किया गया है . इस मंदिर के सामने एक कुंड है जिसे गौरी कुंड कहा जाता है ऐसी मान्यता है कि इस कुंड का पानी पीने से कई रोगों का नाश होता है. 

ये स्थान बहुत ही पवित्र और सुंदर है यहाँ पहुँच कर भक्त सारे दुख भूलकर शांति और सुख की अनुभूति करते है. और भक्तों का कहना है की ये वही मंदिर है जहाँ भगवान शिव ने अपना नंदी त्यागा था. इसी लिए पूरी दुनिया में ये इकलौता मंदिर है जहाँ दो मुख वाले नंदी के दर्शन होते है. 

इसी लिए अमरनाथ यात्रा के लिए देश के कोने कोने से आने वाले श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के बाद यहाँ नंदी के दर्शन करने जरूर आते है. इस मंदिर की देखरेख डिपार्टमेंट ऑफ़ आर्काइव्स आर्कियोलॉजी एंड म्यूज़ियम्स J&K, करता है , जो एक स्टेट/Ut प्रोटेक्टेड मॉन्यूमेंट है और एंशिएंट मॉन्यूमेंट्स एंड प्रिजर्वेशन एक्ट संवत 1977 अमेंडमेंट एक्ट 2010 के तहत प्रोटेक्टेड है.

एबीपी न्यूज़ की टीम यहाँ पहुँची और उसने भी दो मुख वाले नंदी के दर्शन किए और इस मंदिर विशेषता को जाता साथ ही वहाँ मौजूद भोले के भक्तों से ख़ास बातचीत भी की भक्तों का कहना था. यहाँ आके बहुत शांति मिलती है बहुत अच्छा लगता है. हमने सिर्फ़ यही दो मुख वाले नंदी देखा और किसी मंदिर में ऐसे नंदी नजर नहीं आते. कहा जाता है यही नंदी का त्याग भगवान शिव ने किया था. 

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