PoK प्रदर्शन के 31वें दिन पाक रेंजर्स ने फिर दिखाई बर्बरता, फायरिंग में 2 की मौत और 13 घायल

PoK प्रदर्शन के 31वें दिन पाक रेंजर्स ने फिर दिखाई बर्बरता, फायरिंग में 2 की मौत और 13 घायल


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  • पीओके में विरोध प्रदर्शन जारी, स्थिति बिगड़ने की आशंका।

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में गुरुवार (9 जुलाई, 2026) को एक बार फिर से ज़ुल्म और बर्बरता की हदे पार करते हुए पाकिस्तानी रेंजर्स ने रावलाकोट के कोटरी में बैठे 2,000 प्रदर्शनकारियों पर दोपहर ढाई बजे के आसपास फायरिंग खोल दी. तकरीबन 20 से 25 राउंड फायरिंग की गई और आंसू गैस के गोले छोड़े गए, जिसमें 28 साल के वाजिद और 47 साल के सरदार नासिर नाम के दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई और 13 प्रदर्शनकारी घायल हो गए. आज की गोलीबारी के बाद पीओके में पाकिस्तानी सेना की गोली से मरने वालो की संख्या 61 पहुंच चुकी है.

दोपहर की नमाज के बाद पाकिस्तानी रेंजर्स ने की फायरिंग

जानकारी के मुताबिक, रेंजर्स और पीओके पुलिस ने दोपहर की नमाज के ठीक बाद फायरिंग खोली, ताकि 13 जून से कोटरी में डेरा जमाए लोग ग्राउंड खाली कर दें. हालांकि, प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी रेंजर्स की बर्बर कार्रवाई का कोई असर नहीं हुआ है और अभी भी 2,000 से ज्यादा लोग कोटरी में बैठे हुए हैं.

एबीपी न्यूज के हाथ लगी तस्वीरों में भी देखा जा सकता है कि कैसे लोग पाकिस्तानी गोलीबारी में मारे गए अपने साथियों की लाशों को उठाकर ले जा रहे हैं. साथ ही, पाकिस्तानी रेंजर्स की गोलीबारी में मारे गए युवक वाजिद और नासिर का पास में ही पहाड़ी पर लोगों ने पीओके का झंडा लगाकर अंतिम संस्कार किया.

सरकार को दिया अल्टीमेटम खत्म, अब प्रदर्शनकारी निकालेंगे मार्च

प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार को 38 मांगे मानने के लिए बुधवार (8 जुलाई, 2026) की रात 11 बजकर 59 मिनट तक का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन इसके बाद भी जब पाकिस्तानी हुकूमत के कान में जूं नहीं रेंगी, तो गुरुवार (9 जुलाई, 2026) को आखिरकार अवामी एक्शन कमेटी ने ऐलान किया कि अब 15 जुलाई को पूरे PoK से इकट्ठा प्रदर्शनकारी राजधानी मुजफ्फराबाद की ओर मार्च करेंगे.

नेपाल और बांग्लादेश जैसी स्थिति बनने की आशंका

अनुमान जताया जा रहा है कि जिस तरह से पीओके की जनता PoK और पाकिस्तान के सरकारी तंत्र के पूरी तरह खिलाफ है, ऐसे में मुजफ्फराबाद जाने वाले लाखों लोगों का समूह सिर्फ मार्च नहीं करेगा, बल्कि मुजफ्फराबाद में कुछ ऐसी ही स्थिति बन सकती है, जैसी पिछले कुछ सालों में नेपाल और बांग्लादेश में बनी थी. गुरुवार (9 जुलाई) को भी पीओके के अलग-अलग शहरों में पाकिस्तानी सेना और सरकार के खिलाफ मार्च निकाले गए, जिसमें ‘ये जो दहशतगर्दी है, उसके पीछे वर्दी है’ के नारे लगाए गए.

साथ ही प्रदर्शन का एपिसेंटर रावलाकोट का ईदगाह मैदान गुरुवार को भी 70 से 80 हजार प्रदर्शनकारियों से खचाखच भरा नजर आया और पाकिस्तानी रेंजर्स हेलीकॉप्टर से रावलकोट में फायरिंग के बाद निगरानी करते नजर आए. 

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