Mahindra Case: परिवार के लिए कोई भी छोटी से छोटी नई चीज खरीदते समय बेहद एक्साइटमेंट होता है. खासतौर से कार या घर खरीदते समय तो एक्साइटमेंट का लेवल ही अलग होता है. लेकिन सोचिए अगर आपकी बुक की हुई गाड़ी पूरा पेमेंट करने के बाद भी आपके घर में डिलीवर ना हो, तो आपको कैसा लगेगा?
ऐसा ही कुछ हुआ है पुडुचेरी के एक शख्स के साथ, जिसने बड़े ही अरमानों के साथ महिंद्रा एंड महिंद्रा से XUV500 बुक की थी. ना केवल बुक की थी बल्कि पूरा पेमेंट भी कर चुका था. लेकिन ये गाड़ी उसके घर तक कभी पहुंची ही नहीं. जिसके बाद निराश होकर शख्स ने उपभोक्ता फोरम में इसकी शिकायत दर्ज की.
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क्या है पूरा मामला?
दरअसल ये मामला साल 2013 का है, ग्राहक ने महिंद्रा XUV500 W6 खरीदने के लिए पहले 40,000 रुपये एडवांस दिए. इसके बाद बैंक से 8.96 लाख रुपये का लोन लेकर पूरी रकम डीलर के खाते में जमा कर दी. डीलर ने भरोसा दिया था कि एक हफ्ते में कार की डिलीवरी हो जाएगी. लेकिन एक हफ्ते बाद ग्राहक को बताया गया कि कार उपलब्ध नहीं है और डिलीवरी में एक महीने की देरी होगी. इसके बाद भी कई बार पूछने पर उसे केवल टालने वाले बातें कही गईं और कार कभी नहीं दी गई.
क्या कहना है आयोग का?
इसके बाद ग्राहक ने उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज की, इस शिकायत के बाद आयोग ने पूरा मामला जानकर, दोनों पक्षों को सुनकर ये माना कि ये डीलर की बड़ी लापरवाही थी. वहीं, कंपनी भी कार की डिलीवरी सुनिश्चित नहीं कर सकी, इसलिए दोनों जिम्मेदार हैं. जिसके बाद आयोग ने आदेश देते हुए कहा कि महिंद्रा एंड महिंद्रा ग्राहक को 8.71 लाख रुपये 12% सालाना ब्याज के साथ लौटाए. डीलर मानसिक पीड़ा, सेवा में कमी और अन्य परेशानियों के लिए 1.5 लाख रुपये मुआवजा दे.
इतना ही नहीं बल्कि कंपनी भी एक्स्ट्रा 50 हजार रुपये मुआवजा दे. साथ ही साथ डीलर मुकदमे के खर्च के लिए 10 हजार रुपये अदा करे. उपभोक्ता फोरम के इस फैसले से ग्राहक को जो आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी हुई है उससे उसे राहत मिलेगी.
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