बरसात में उखड़ी सड़क पर NHAI सख्त, दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर की गुणवत्ता जांच के लिए SIT

बरसात में उखड़ी सड़क पर NHAI सख्त, दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर की गुणवत्ता जांच के लिए SIT


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  • गुणवत्ता में कमी पर ठेकेदार स्वयं खर्च पर सुधार करेगा।

दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर पहली ही बरसात में सड़क किनारों पर गड्ढे और धंसाव सामने आने के बाद उठे सवालों के बीच भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने गुणवत्ता जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित कर दिया है. विभाग की तरफ से शुक्रवार (10 जुलाई, 2026) को इस संबंध में आधिकारिक बयान भी जारी कर दिया गया है.

प्राधिकरण ने बयान जारी कर दी जानकारी

बयान में संबंधित प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर की स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट कराई जाएगी, ताकि निर्माण गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच हो सके.

उल्लेखनीय कि पिछले दिनों बागपत क्षेत्र में कॉरिडोर के कई हिस्सों पर बारिश के बाद सड़क किनारों की मिट्टी धंस गई थी और कुछ स्थानों पर गड्ढे बन गए थे. इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे. NHAI और निर्माण एजेंसी ने तत्काल मरम्मत शुरू कराई थी, लेकिन मामला चर्चा में आने के बाद अब प्राधिकरण ने विस्तृत तकनीकी जांच कराने का निर्णय लिया है.

सिर्फ रात में किया जाएगा कोर कटिंग का काम

NHAI के अनुसार, जांच दल सड़क की गुणवत्ता का आकलन करने के लिए 23 अलग-अलग स्थानों से कोर कटिंग करेगा. प्रत्येक स्थान पर दो से तीन नमूने लेकर सड़क की विभिन्न परतों की मोटाई, गुणवत्ता और निर्माण मानकों की जांच की जाएगी. इसके लिए सड़क के किनारे, मध्य रेखा और सेंटर लाइन से नमूने लिए जाएंगे.

वहीं, यातायात प्रभावित न हो, इसलिए कोर कटिंग का कार्य केवल रात्रि में किया जाएगा और जहां जरूरत होगी, वहां अस्थायी डायवर्जन बनाया जाएगा, लेकिन किसी भी स्थान पर छह घंटे से अधिक समय तक यातायात प्रभावित नहीं रहने दिया जाएगा. 

एसआईटी में कौन-कौन होगा शामिल?

जांच दल में स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट एजेंसी, NHAI के इंजीनियर, सेवानिवृत्त चीफ इंजीनियर और अथॉरिटी इंजीनियर के प्रतिनिधि शामिल रहेंगे. टीम सड़क निर्माण से जुड़े सभी तकनीकी मानकों का परीक्षण करेगी और अपनी रिपोर्ट प्राधिकरण को सौंपेगी.

गुणवत्ता के मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति- NHAI

NHAI ने कहा कि वह गुणवत्ता के मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य करता है. अगर जांच में कहीं भी निर्माण में कमी पाई जाती है तो संबंधित ठेकेदार से अपने खर्च और जोखिम पर तत्काल सुधार कराया जाएगा. प्राधिकरण का कहना है कि सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर को सुरक्षित, टिकाऊ और उच्च गुणवत्ता वाला बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. 

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