देश में फिलहाल इथेनॉल को लेकर बवाल मचा हुआ है. अब इस इथेनॉल के बारे में ग्रेन इथेनॉल मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. चंद्र कुमार जैन ने कहा है कि मेरे प्लांट में 10 साल पुरानी कारें बिना किसी इंजन खराबी के ठीक चल रही हैं.
जैन ने लोगों को सुझाव दिया है कि वह किसी भी तरह की गलतफहमियों में न आएं. न ही इन बातों पर ध्यान दें. इनके पीछे कोई टेक्निकल आधार नहीं है. सरकार बेवकूफ नहीं है. सरकार बहुत समझदार है.
सरकार ने चार साल तक इसपर स्टडी की है
उन्होंने कहा कि सरकार ने चार साल तक स्टडी की है. उसके बाद इसे लागू किया. नीति आयोग ने कहा है कि माइलेज में 2 से 4% की कमी हो सकती है. लेकिन मुझे लगता है कि आप भी दिल्ली में रहते हैं. रेड लाइट पर आपका कितना माइलेज कम होता है?
जैन ने पूछा- ट्रैफिक जाम में कितना माइलेज होता है कम
जैन ने आगे पूछा कि ट्रैफिक जाम में कितना माइलेज कम होता है? आप उस माइलेज को क्यों नहीं गिनते? हम सिर्फ 2 से 4 प्रतिशत की कमी को ही क्यों गिन रहे हैं? आज सरकार उसी कीमत पर RON 95 ऑक्टेन दे रही है. फर्क देखिए. आज पेट्रोल कहीं बेहतर है.
सरकार की नई पॉलिसी पेट्रोल में इथेनॉल को लेकर क्या विवाद है?
दरअसल, पूरा विवाद सरकार की नई पॉलिसी पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलने को लेकर छिड़ा हुआ है. इसका मुख्य विवाद वाहन मालिकों के खराब होते माइलेज और इंजन के नुकसान से जुड़ा है. कंज्यूमर शुद्ध पेट्रोल का विकल्प न मिलने पर लगातार विरोध कर रहे हैं. इथेनॉल का विवाद माइलेज और महंगे ईंधन को लेकर भी है. इसके अलावा लोगों की शिकायत है कि यह इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से गाड़ियों का माइलेज 10 से 30 प्रतिशत कम हो गया है. इसका उनका बजट गड़बड़ा रहा है.
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