इंटरनेशनल क्रिकेट में मैच फिक्सिंग की क्या सजा मिलती है?

इंटरनेशनल क्रिकेट में मैच फिक्सिंग की क्या सजा मिलती है?


क्रिकेट में मैच फिक्सिंग को खेल की सबसे गंभीर अनियमितताओं में गिना जाता है. हाल ही में श्रीलंका के पूर्व ऑफ स्पिनर सचित्र सेनानायके को लंका प्रीमियर लीग के दौरान एक साथी खिलाड़ी को मैच फिक्सिंग के लिए उकसाने का दोषी ठहराया गया. इस फैसले के बाद एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि अगर भारत में कोई क्रिकेटर मैच फिक्सिंग का दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई हो सकती है और भारतीय कानून इस मामले को कैसे देखता है.

इंटरनेशनल क्रिकेट में मैच फिक्सिंग की क्या सजा?

इंटरनेशनल क्रिकेट में मैच फिक्सिंग को खेल की सबसे गंभीर भ्रष्ट गतिविधियों में माना जाता है. इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) के एंटी-करप्शन नियमों के तहत दोषी पाए जाने वाले खिलाड़ी, टीम अधिकारी या कोई भी अन्य संबंधित व्यक्ति पर मामले की गंभीरता के अनुसार 5 साल या उससे अधिक अवधि का प्रतिबंध लगाया जा सकता है. अगर मामला गंभीर हो तब आजीवन बैन भी लगाया जाता है, जिससे वह व्यक्ति किसी भी मान्यता प्राप्त क्रिकेट गतिविधि में हिस्सा नहीं ले सकता.

यदि जांच के दौरान सबूत छिपाने, नष्ट करने या जांच एजेंसियों के साथ सहयोग न करने जैसी बातें सामने आती हैं, तो सजा और भी कड़ी हो सकती है. इसके अलावा कई देशों में मैच फिक्सिंग को आपराधिक अपराध माना जाता है, जहां दोषी पर भारी जुर्माना, अवैध कमाई की जब्ती और स्थानीय कानूनों के अनुसार जेल की सजा भी हो सकती है. इसलिए ICC मैच फिक्सिंग के मामलों में सख्त एंटी-करप्शन नीति अपनाता है, ताकि क्रिकेट की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनी रहे.

भारत में मैच फिक्सिंग पर क्या है कानून?

भारत में फिलहाल मैच फिक्सिंग को लेकर कोई अलग और विशेष कानून लागू नहीं है. ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां कई बार भारतीय दंड संहिता की धोखाधड़ी से जुड़ी धाराओं, जैसे धारा 420, का सहारा लेती हैं. हालांकि केवल इसी आधार पर मैच फिक्सिंग के मामलों में मजबूत कानूनी कार्रवाई करना आसान नहीं माना जाता. यही वजह है कि लंबे समय से इस विषय पर अलग कानून बनाने की मांग भी उठती रही है.

सट्टेबाजी और फिक्सिंग को कैसे देखा जाता है?

भारत में अवैध सट्टेबाजी और मैच फिक्सिंग को गंभीर अपराध माना जाता है. हालांकि सट्टेबाजी से जुड़े नियम अलग-अलग राज्यों में अलग हो सकते हैं. कई देशों में खेलों पर सट्टेबाजी कानूनी है, लेकिन भारत में इसकी कानूनी स्थिति सीमित और जटिल बनी हुई है. ऐसे में फिक्सिंग से जुड़े मामलों की जांच परिस्थितियों और उपलब्ध सबूतों के आधार पर की जाती है.

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI मैच फिक्सिंग और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों पर लगातार नजर रखता है. इसके लिए बोर्ड ने एंटी करप्शन यूनिट (ACU) और सख्त आचार संहिता लागू कर रखी है. खिलाड़ियों, सपोर्ट स्टाफ और टीम से जुड़े अन्य लोगों को संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत ACU को देना अनिवार्य होता है.

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दोषी खिलाड़ियों पर लग सकता है आजीवन बैन

अगर किसी खिलाड़ी के खिलाफ मैच फिक्सिंग या भ्रष्टाचार के आरोप साबित हो जाते हैं, तो BCCI उस पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करता है. मामले की गंभीरता के आधार पर खिलाड़ी को लंबे समय के लिए निलंबित किया जा सकता है या फिर आजीवन प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है.

पहले भी कई भारतीय और विदेशी क्रिकेटरों पर ऐसे मामलों में बैन लगाया जा चुका है. मैच फिक्सिंग सिर्फ एक खिलाड़ी के करियर को खत्म नहीं करती, बल्कि खेल की विश्वसनीयता और करोड़ों प्रशंसकों के भरोसे को भी गहरा नुकसान पहुंचाती है. यही कारण है कि क्रिकेट की सर्वोच्च संस्थाएं इस तरह के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाती हैं.

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