Delivery के लिए Hospital चुनने से पहले ये 7 सवाल पूछना मत भूलिए

Delivery के लिए Hospital चुनने से पहले ये 7 सवाल पूछना मत भूलिए


सबसे पहला और सबसे जरूरी सवाल यह है कि क्या उस हॉस्पिटल में गायनेकोलॉजिस्ट दिन-रात यानी चौबीसों घंटे उपलब्ध रहती हैं या नहीं. डिलीवरी का समय पहले से तय नहीं होता, यह किसी भी वक्त शुरू हो सकती है. ऐसे में अगर डॉक्टर सिर्फ कुछ तय घंटों के लिए ही उपलब्ध हों, तो इमरजेंसी में परेशानी हो सकती है. इसलिए यह जरूर पता करें कि रात में या छुट्टी के दिन भी कोई अनुभवी गायनेकोलॉजिस्ट हॉस्पिटल में मौजूद रहेंगी या नहीं.

दूसरा सवाल यह है कि नॉर्मल डिलीवरी और सी-सेक्शन डिलीवरी का रेट कितना है और उसे करने में कितना समय लगता है. दोनों तरीकों का अपना अलग प्रोसेस होता है और समय भी अलग-अलग लगता है. हॉस्पिटल से पहले ही यह जान लेना चाहिए कि किस तरह की डिलीवरी में कितना वक्त लग सकता है, ताकि परिवार को पूरी जानकारी रहे और वे मानसिक रूप से तैयार रह सकें.

दूसरा सवाल यह है कि नॉर्मल डिलीवरी और सी-सेक्शन डिलीवरी का रेट कितना है और उसे करने में कितना समय लगता है. दोनों तरीकों का अपना अलग प्रोसेस होता है और समय भी अलग-अलग लगता है. हॉस्पिटल से पहले ही यह जान लेना चाहिए कि किस तरह की डिलीवरी में कितना वक्त लग सकता है, ताकि परिवार को पूरी जानकारी रहे और वे मानसिक रूप से तैयार रह सकें.

तीसरा सवाल पैसों से जुड़ा हुआ है. हर हॉस्पिटल डिलीवरी के लिए अलग-अलग पैकेज देता है, लेकिन यह जानना बहुत जरूरी है कि उस पैकेज में असल में क्या-क्या शामिल है. इसमें रूम का चार्ज, डॉक्टर की विजिट का चार्ज, इमरजेंसी चार्ज, जरूरी जांच यानी टेस्ट का चार्ज और दवाइयों का चार्ज शामिल हैं या नहीं, यह पहले ही साफ कर लेना चाहिए. ऐसा करने से बाद में अचानक कोई एक्स्ट्रा बिल आने की टेंशन नहीं रहती है.

तीसरा सवाल पैसों से जुड़ा हुआ है. हर हॉस्पिटल डिलीवरी के लिए अलग-अलग पैकेज देता है, लेकिन यह जानना बहुत जरूरी है कि उस पैकेज में असल में क्या-क्या शामिल है. इसमें रूम का चार्ज, डॉक्टर की विजिट का चार्ज, इमरजेंसी चार्ज, जरूरी जांच यानी टेस्ट का चार्ज और दवाइयों का चार्ज शामिल हैं या नहीं, यह पहले ही साफ कर लेना चाहिए. ऐसा करने से बाद में अचानक कोई एक्स्ट्रा बिल आने की टेंशन नहीं रहती है.

चौथा सवाल बच्चे की सुरक्षा से जुड़ा है. यह पता करना बहुत जरूरी है कि हॉस्पिटल में NICU यानी नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट या NCU यानी नर्सरी केयर यूनिट की सुविधा है या नहीं. कई बार बच्चा समय से पहले पैदा हो जाता है या जन्म के बाद उसे कुछ खास देखभाल की जरूरत पड़ जाती है. ऐसे में अगर हॉस्पिटल में यह सुविधा पहले से मौजूद हो, तो बच्चे को तुरंत सही इलाज मिल पाता है.

चौथा सवाल बच्चे की सुरक्षा से जुड़ा है. यह पता करना बहुत जरूरी है कि हॉस्पिटल में NICU यानी नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट या NCU यानी नर्सरी केयर यूनिट की सुविधा है या नहीं. कई बार बच्चा समय से पहले पैदा हो जाता है या जन्म के बाद उसे कुछ खास देखभाल की जरूरत पड़ जाती है. ऐसे में अगर हॉस्पिटल में यह सुविधा पहले से मौजूद हो, तो बच्चे को तुरंत सही इलाज मिल पाता है.

पांचवां सवाल यह है कि क्या हॉस्पिटल में पीडियाट्रिशियन यानी बच्चों के डॉक्टर हर वक्त उपलब्ध रहते हैं. क्योंकि जन्म के तुरंत बाद बच्चे की जांच और देखभाल के लिए बच्चों के डॉक्टर का मौजूद होना बहुत जरूरी होता है.  अगर किसी भी वजह से बच्चे को तुरंत मेडिकल मदद की जरूरत पड़े, तो डॉक्टर का तुरंत उपलब्ध होना बहुत जरूरी होता है.

पांचवां सवाल यह है कि क्या हॉस्पिटल में पीडियाट्रिशियन यानी बच्चों के डॉक्टर हर वक्त उपलब्ध रहते हैं. क्योंकि जन्म के तुरंत बाद बच्चे की जांच और देखभाल के लिए बच्चों के डॉक्टर का मौजूद होना बहुत जरूरी होता है.  अगर किसी भी वजह से बच्चे को तुरंत मेडिकल मदद की जरूरत पड़े, तो डॉक्टर का तुरंत उपलब्ध होना बहुत जरूरी होता है.

छठा सवाल यह है कि क्या हॉस्पिटल डिलीवरी के समय पति या परिवार के किसी सदस्य को महिला के साथ रहने की अनुमति देता है. इसे बर्थिंग पार्टनर कहा जाता है. कई महिलाओं के लिए डिलीवरी के मुश्किल समय में अपने किसी करीबी का साथ होना बहुत सहारा देता है. क्योंकि उस दौरान महिला को फिजिकली के साथ-साथ मेंटली सपोर्ट की भी जरूरत पड़ती है. इसलिए डिलीवरी से पहले ही हॉस्पिटल की इस पॉलिसी के बारे में जानकारी ले लेनी चाहिए.

छठा सवाल यह है कि क्या हॉस्पिटल डिलीवरी के समय पति या परिवार के किसी सदस्य को महिला के साथ रहने की अनुमति देता है. इसे बर्थिंग पार्टनर कहा जाता है. कई महिलाओं के लिए डिलीवरी के मुश्किल समय में अपने किसी करीबी का साथ होना बहुत सहारा देता है. क्योंकि उस दौरान महिला को फिजिकली के साथ-साथ मेंटली सपोर्ट की भी जरूरत पड़ती है. इसलिए डिलीवरी से पहले ही हॉस्पिटल की इस पॉलिसी के बारे में जानकारी ले लेनी चाहिए.

सातवां और आखिरी सवाल यह है कि लेबर पेन के दौरान महिला को चलने-फिरने या अपनी पोजीशन बदलने की अनुमति दी जाती है या नहीं. कई हॉस्पिटल में महिला को बिस्तर तक ही सीमित रखा जाता है, जबकि कुछ जगहों पर हल्की-फुल्की मूवमेंट की इजाजत दी जाती है, जो दर्द को थोड़ा कम करने और डिलीवरी को आसान बनाने में मदद कर सकती है.

सातवां और आखिरी सवाल यह है कि लेबर पेन के दौरान महिला को चलने-फिरने या अपनी पोजीशन बदलने की अनुमति दी जाती है या नहीं. कई हॉस्पिटल में महिला को बिस्तर तक ही सीमित रखा जाता है, जबकि कुछ जगहों पर हल्की-फुल्की मूवमेंट की इजाजत दी जाती है, जो दर्द को थोड़ा कम करने और डिलीवरी को आसान बनाने में मदद कर सकती है.

Published at : 08 Aug 2026 09:59 PM (IST)

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