Kanwar Yatra 2026: कलयुग की ‘श्रवण कुमार’, सासू मां को कंधे पर लादकर कांवड़ यात्रा पर निकली बहू

Kanwar Yatra 2026: कलयुग की ‘श्रवण कुमार’, सासू मां को कंधे पर लादकर कांवड़ यात्रा पर निकली बहू


Kanwar Yatra 2026: जब भी माता-पिता के प्रति संतान के समर्पण और निस्वार्थ प्रेम की बात होती है, तो सबसे पहले पौराणिक पात्र ‘श्रवण कुमार’ की याद आती है. कलयुग के इस दौर में जहां सास-बहू के रिश्तों के खट्टे-मीठे किस्से अक्सर सुनने को मिलते हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के मेरठ से आई एक बेहद खूबसूरत तस्वीर ने हर किसी का दिल जीत लिया है.

अपनी सास की अंतिम इच्छा जैसी पवित्र चाहत को पूरा करने के लिए एक बहू खुद ‘श्रवण कुमार’ बन गई. वह अपनी 12 साल की नन्हीं बेटी के साथ सास को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से गंगा जल लेकर पैदल अपने घर की ओर निकल पड़ी है.

18 दिन की पैदल यात्रा, लेकिन चेहरे पर थकान की एक शिकन तक नहीं

यह प्रेरक कहानी उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के निजामपुर गांव की रहने वाली राधा की है. राधा की सासू मां की तीव्र इच्छा थी कि वे हरिद्वार में गंगा स्नान करें और वहां से कांवड़ लाकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करें.

सास की इस इच्छा को सिर-आंखों पर रखते हुए बहू राधा अपनी 12 साल की बेटी प्रिया के साथ 10 जुलाई को घर से निकलीं. 11 जुलाई की सुबह हरिद्वार पहुंचकर गंगा स्नान किया और अपनी सास को कांवड़ में बैठाकर जल लेकर पैदल ही घर के लिए निकल पड़ीं.

तस्वीर में क्या खास है?

मेरठ के कैंट इलाके की सड़कों से गुजरती राधा और उनकी 12 साल की बेटी प्रिया मिलकर सास को कांवड़ की तराजू में बैठाकर उठा रही हैं. लगभग 18 दिनों से लगातार पैदल चलने के बाद भी न तो राधा के चेहरे पर शिकन है और न ही कोई थकान.

“सास को मां समझोगी, तो वो भी तुम्हें बेटी का प्यार देंगी”

एबीपी न्यूज से एक्सक्लूसिव बातचीत में बहू राधा ने देश की सभी बहुओं के लिए एक खूबसूरत संदेश दिया. राधा ने कहा:

“हमने यह पहल इसलिए की ताकि समाज में एक अच्छा संदेश जाए. अगर देश की हर बहू अपनी सास को सास नहीं बल्कि मां समझेगी, तो निश्चित तौर पर सास भी बहू को बेटी जैसा ही प्यार और सम्मान देगी.”

सासू मां बोलीं- “यह मेरी बहू नहीं, मेरा बेटा है”

बहू के इस समर्पण और त्याग को देखकर सासू मां की आंखें भी भर आईं. उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि राधा उनके लिए सिर्फ बहू नहीं,  उनका बेटा है. कलयुग के इस दौर में उनकी बहू उनके लिए साक्षात ‘श्रवण कुमार’ बनकर आई है.

मेरठ की सड़कों पर जिसने भी इस कलयुगी श्रवण कुमार (बहू राधा) और उनकी मासूम बेटी को देखा, वह उनके इस अटूट प्रेम और श्रद्धा को सलाम किए बिना नहीं रह सका. यह तस्वीर आज पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है.

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