NMC New Rules: देशभर के मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी की नियुक्ति और प्रमोशन की प्रक्रिया को लेकर एनएमसी ने बड़ा बदलाव किया है. अब मेडिकल कॉलेज, यूनिवर्सिटी और दूसरे नियुक्ति प्राधिकरण अपने यहां फैकल्टी की नियुक्ति, पदोन्नति और पदनाम से जुड़े फैसले खुद करेंगे. एनएमसी अब सामान्य मामलों में पात्रता प्रमाण पत्र जारी नहीं करेगा और न ही ऐसे मामलों में नियमित रूप से हस्तक्षेप करेगा. एनएमसी के पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड की ओर से जारी सार्वजनिक नोटिस के अनुसार यह फैसला इसलिए लिया गया है, क्योंकि बड़ी संख्या में मेडिकल कॉलेज, यूनिवर्सिटी और फैकल्टी सदस्यों और एनबीईएमएस से मान्यता प्राप्त अस्पताल की ओर से पात्रता से जुड़े ऐसे मामले भेजे जा रहे थे, जिनका समाधान पहले से लागू नियमों के तहत संस्थान खुद कर सकते थे.
मेडिकल कॉलेज को सौंपी गई ज्यादा जिम्मेदारी
एनएमसी ने स्पष्ट किया कि मेडिकल इंस्टीट्यूशन्स क्वालिफिकेशन ऑफ फैकल्टी रेगुलेशन 2025 में फैकल्टी पदों के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता, शिक्षण अनुभव, रिसर्च पब्लिकेशन और प्रशिक्षण से जुड़े सभी मानदंड पहले से तय है. ऐसे में किसी उम्मीदवार की नियुक्ति प्रमोशन या पदनाम के लिए पात्रता करने की जिम्मेदारी संबंधित मेडिकल कॉलेज, यूनिवर्सिटी और नियुक्ति प्राधिकरण की होगी. इसी वजह से अब पीजीएमईबी उन मामलों पर विचार नहीं करेगी, जिनका निर्णय सीधे इन नियमों के आधार पर किया जा सकता है.
किन मामलों में एनएमसी करेगा हस्तक्षेप?
एनएमसी के अनुसार अब केवल ऐसे मामलों पर विचार किया जाएगा, जहां नियमों की व्याख्या को लेकर अस्पष्टता हो, योग्यता की समानता का प्रश्न हो, ट्रांजिशन से जुड़े प्रावधान हो या किसी दूसरे नियामकीय नियम साथ समन्वय की जरूरत हो. ऐसे मामलों को संबंधित संस्थान के डीन, डायरेक्टर, प्रिंसिपल या रजिस्ट्रार के माध्यम से ही भेजा जा सकेगा. आवेदन के साथ यह भी स्पष्ट करना होगा कि एमआई क्यूएफआर-2025 के किस प्रावधान को लेकर भ्रम है और उसके साथ उसके समर्थन में आवश्यक दस्तावेज भी देने होंगे.
25,000 फीस के साथ भेजना होगा मामला
ऐसे विशेष मामलों में एनएमसी को भेजे जाने वाले प्रत्येक आवेदन के साथ 25,000 प्रोसेसिंग फीस और उस पर लागू 18 प्रतिशत जीएसटी जमा करना होगा. यह राशि वापस नहीं की जाएगी. एनएमसी ने यह भी साफ किया है कि अगर कोई व्यक्ति सीधे आयोग को आवेदन भेजता है, तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा और न ही उसे पर कोई कार्रवाई होगी. वहीं अगर कोई मेडिकल कॉलेज या यूनिवर्सिटी किसी वास्तविक मामले को आवेदन मिलने के 60 दिन बाद भी एनएमसी को नहीं भेजता है, तो संबंधित उम्मीदवार सीधे पीजीएमआईबी के पास आवेदन कर सकता है. इसके लिए उम्मीदवार को एक हस्ताक्षरित घोषणा, संस्थान की ओर से निर्धारित समय में कार्रवाई न करने के प्रमाण, सभी जरूरी डॉक्यूमेंट और 25,000 के साथ जीएसटी जमा करना होगा. ऐसी स्थिति में अगर संस्थान ने पहले फीस ली थी, तो उसे उम्मीदवार को वापस करनी होगी.
कब से लागू होंगे नियम?
एनएमसी ने बताया कि यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है. हालांकि 16 जुलाई से पहले प्राप्त आवेदन पुराने नियमों के तहत निपटाए जाएंगे, जबकि उसके बाद प्राप्त सभी आवेदन नई प्रक्रिया के अनुसार ही देखे जाएंगे.
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