भारत ने शुक्रवार (17 जुलाई) को कहा कि वह अमेरिका के प्रस्तावित कानून पर बारीकी से नजर रख रहा है. इस कानून के तहत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों, जिनमें भारत और चीन भी शामिल हैं उन पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाया जा सकता है. बताया जा रहा है कि इस बिल को अमेरिका के करीब 60 सीनेटरों का समर्थन मिल रहा है. भारत ने साथ ही कहा कि अमेरिकी वीजा नीतियों के कारण भारतीय नागरिकों को होने वाली परेशानियां कम करने के लिए वह अमेरिकी अधिकारियों के संपर्क में है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा, “हम इन घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और हमें इस प्रस्तावित कानून के बारे में जानकारी है.” प्रस्तावित बिल के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “जहां तक तेल खरीदने की बात है, हम दुनिया के कई देशों से तेल खरीदते हैं. यह हमारे नजरिए पर निर्भर करता है.”
रूस से तेल खरीद को लेकर ये कानून लाने का विचार डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लुमेंथल और दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने दिया था. इसका मकसद रूस के वित्तीय संस्थानों और ऊर्जा क्षेत्र पर कड़े प्रतिबंध लगाना है ताकि उस आमदनी को रोका जा सके, जिसका इस्तेमाल रूस यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के लिए करता है.
किन देशों पर टैरिफ लगाना चाहता है अमेरिका?
अमेरिकी सीनेटर ब्लूमेंथल ने मंगलवार को कहा कि प्रस्तावित कानून का मकसद रूसी तेल खरीदने वाले 5 बड़े देशों चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाना है. यह बिल उन देशों को निशाना बनाएगा जो रूसी कच्चा तेल खरीदना जारी रखे हुए हैं. मॉस्को पर दबाव बढ़ाने की कोशिश में इन देशों पर अतिरिक्त भारी जुर्माना लगाया जा सकता है.
अमेरिका ने विदेशी छात्रों, लोगों और पत्रकारों के लिए वीजा नियमों को सख्त कर दिया है. इसके साथ ही दशकों पुरानी वह नीति खत्म हो गई है जिसके तहत वे बिना सरकारी निगरानी के देश में अनिश्चितकाल तक रह सकते थे. इस कदम से बड़ी संख्या में भारतीयों पर असर पड़ने की आशंका है.
वीजा नियमों को लेकर क्या कहा
रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘‘हमने वीजा नियमों से जुड़ी कुछ खबरें देखी हैं. वीजा नियम, वीजा जारी करने की प्रक्रिया और आव्रजन से जुड़े मामले किसी भी देश के संप्रभु अधिकार के दायरे में आते हैं.’ उन्होंने कहा कि वैध यात्रियों और छात्रों सहित अन्य लोगों को होने वाली परेशानियों के मामले जब हमारे संज्ञान में लाए जाते हैं तो हम अपने लोगों की परेशानियां कम करने के लिए अमेरिकी पक्ष के समक्ष ये मुद्दे उठाते हैं.
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