Ravi Pradosh Vrat 2026: आषाढ़ का पहला प्रदोष व्रत 11 या 12 जुलाई कब? कंफ्यूज न हो, सही तारीख मे

Ravi Pradosh Vrat 2026: आषाढ़ का पहला प्रदोष व्रत 11 या 12 जुलाई कब? कंफ्यूज न हो, सही तारीख मे


Ravi Pradosh Vrat 2026: आषाढ़ माह में दो रवि प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है. इसमें पहला रवि प्रदोष 12 जुलाई को और दूसरा 26 जुलाई 2026 को रहेगा. प्रदोष व्रत वार अनुसार अलग-अलग फल देते हैं. लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ और प्रतिष्ठा के लिए रवि प्रदोष व्रत करने का विधान है.

मान्यता है इसके फल स्वरूप व्यक्ति की कुंडली में सूर्य मजबूत होता है और उसे राजयोग की प्राप्ति भी हो सकती है. रोग, दोष दूर होते हैं. रवि प्रदोष व्रत के दिन किस समय और कैसे करें शिव पूजा जान लें.

आषाढ़ रवि प्रदोष व्रत 2026 मुहूर्त

12 जुलाई 2026 को आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि सुबह 2 बजकर 04 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 12 जुलाई को रात 10.29 मिनट पर इसका समापन होगा. चूंकि प्रदोष व्रत में शिव पूजा प्रदोष काल में की जाती है, और 12 जुलाई को प्रदोष क

पूजा मुहूर्त – रात 7.22 से रात 9.24 मिनट तक (ये प्रदोष काल पूजा मुहूर्त है)

रवि प्रदोष व्रत करने के क्या फायदे

  • शिव पुराण के अनुसार रविवार के प्रभाव के कारण सूर्य देव से जुड़े तेज, यश और आत्मबल की कामना भी की जाती है, हालांकि प्रदोष व्रत का मुख्य आराध्य भगवान शिव ही हैं.
  • पापों के क्षय और आध्यात्मिक उन्नति की कामना से.
  • परिवार में सुख, शांति और समृद्धि के लिए.
  • रोग, शोक और संकटों से रक्षा की प्रार्थना के लिए.

पुराणों में रवि प्रदोष व्रत का महत्व

स्कंद पुराण के अनुसार प्रदोष काल में भगवान शिव नंदी पर विराजमान होकर देवगणों से घिरे रहते हैं. इस समय जो भक्त श्रद्धापूर्वक शिव की पूजा करता है उसकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और पापों का नाश होता है.

प्रदोषसमये देवः शूलपाणिर्महेश्वरः। भक्तानामभयं दत्त्वा तुष्टो भवति शङ्करः॥

अर्थात – प्रदोष काल में त्रिशूलधारी भगवान महेश्वर अपने भक्तों को अभय प्रदान करते हैं और उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर मनोवांछित फल देते हैं.

रवि प्रदोष व्रत पर प्रदोष काल में पूजा कैसे करें

  • प्रदोष व्रत के दिन स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें.
  • महादेव को शुद्ध जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी और अंत में शुद्ध जल से अभिषेक करें.
  • तीन पत्तियों वाला ताजा बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, सफेद पुष्प, चंदन और भस्म अर्पित करें.
  • घी का दीपक और धूप जलाकर भगवान शिव की आराधना करें.
  • कम से कम 108 बार ॐ नमः शिवाय महामृत्युंजय मंत्र का जप करें.
  • शिव चालीसा, शिव तांडव स्तोत्र, रुद्राष्टकम या शिव पुराण का पाठ करें.
  • प्रदोष काल में भगवान शिव की आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें.
  • श्रद्धा अनुसार अन्न, वस्त्र, फल या दक्षिणा का दान करें.
  • पूजा पूर्ण होने के बाद भोलेनाथ पर चढ़ाया जल पूरे घर में छिड़कें. इसे तुलसी के गमले में न डालें.
  • अगर आपने मिट्टी के शिवलिंग बनाकर पूजा की है तो उस पर चढ़ाया भोग ग्रहण न करें. ये शिव के गणों को समर्पित होता है. इसे नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए.

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