Ujjain Mahakal: सावन के पहले दिन महाकाल में अद्भुत भस्म आरती, तड़के 3 बजे उमड़ा जनसैलाब, भांग स

Ujjain Mahakal: सावन के पहले दिन महाकाल में अद्भुत भस्म आरती, तड़के 3 बजे उमड़ा जनसैलाब, भांग स


Ujjain Mahakal, Sawan 2026: आज से शिव भक्तों के सबसे प्रिय महीने यानी पवित्र सावन मास की शुरुआत हो गई है. सावन के पहले ही दिन मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में अद्भुत आस्था और उत्साह की झलक देखने को मिली.

तड़के ब्रह्म मुहूर्त में भगवान महाकाल की भव्य और अलौकिक भस्म आरती संपन्न हुई, जिसमें शामिल होने के लिए देश के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालु पहुंचे.

पंचामृत स्नान और भांग का अलौकिक श्रृंगार

तड़के 3 बजे मंदिर के पट खुलते ही पूरा परिसर “हर-हर महादेव” और “जय श्री महाकाल” के जयघोषों से गुंजायमान हो उठा.

दूध और फलों के रस से स्नान: सबसे पहले भगवान महाकाल को जल अर्पित कर दूध, दही, घी, शहद और विभिन्न फलों के रसों (पंचामृत) से दिव्य स्नान कराया गया.

दिव्य श्रृंगार: इसके बाद पुजारियों द्वारा भगवान महाकाल का भांग, सूखे मेवों, चंदन और ताजे पुष्पों से राजाधिराज के रूप में मनमोहक श्रृंगार किया गया.

भस्म रमी: महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से परंपरा अनुसार भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई. भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का रूप इतना अलौकिक लग रहा था कि श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे.

श्रद्धालुओं का उमड़ा जनसैलाब

सावन का पहला दिन होने के कारण मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा देखा गया. तड़के हुई इस भस्म आरती का साक्षी बनने के लिए लोग देर रात से ही कतारों में लगे हुए थे.

मंदिर समिति की व्यवस्था: सावन के महीने में उमड़ने वाली अपार भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा सुरक्षा व सुगम दर्शन के कड़े इंतजाम किए गए हैं, ताकि दूर-दराज से आने वाले शिवभक्तों को आसानी से दर्शन हो सकें.

सावन में महाकाल दर्शन का महत्व

मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान शिव पृथ्वी लोक पर ही विराजमान रहकर अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं. महाकालेश्वर में होने वाली भस्म आरती का अपना एक विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है. सावन के हर सोमवार को महाकाल की भव्य सवारी भी निकाली जाएगी, जिसे लेकर उज्जैन नगरी में उत्सव का माहौल है.

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