Yogini Ekadashi 2026 Date, Shubh Muhurat and Puja Vidhi: सनातन धर्म में आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है, जिसे योगिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है. इस वर्ष यह पवित्र व्रत 10 जुलाई को पूरे देश में पूरी श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा.
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, इस दिन पूरी निष्ठा से व्रत रखकर भगवान विष्णु की आराधना करने से मनुष्य के जाने-अनजाने में किए गए सभी पापों का नाश होता है. इसके साथ ही जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य (आरोग्य) की प्राप्ति होती है.
उदया तिथि के अभाव में भी 10 जुलाई को ही क्यों रखा जाएगा व्रत?
पंचांग की गणना के अनुसार, इस वर्ष एकादशी तिथि के समय को लेकर एक विशेष संयोग बन रहा है:
- एकादशी तिथि का प्रारंभ: 10 जुलाई की सुबह 08:16 बजे से
- एकादशी तिथि का समापन: 11 जुलाई की सुबह 05:22 बजे पर
शास्त्रों का मत: धार्मिक विद्वानों और ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, भले ही 10 जुलाई को उदया तिथि (सूर्योदय के समय एकादशी तिथि) का अभाव हो, लेकिन सुबह से ही एकादशी तिथि लग जाने के कारण इसी दिन व्रत रखना शास्त्रों के अनुसार सबसे अधिक शुभ, फलदायी और न्यायसंगत माना गया है.
पितरों की तृप्ति और वंश वृद्धि के लिए विशेष फलदायी
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, योगिनी एकादशी व्रत स्वास्थ्य, समृद्धि और मोक्ष प्रदान करने वाला है. ऐसी मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हुए भी इस विशेष दिन अपने भक्तों की सच्ची पुकार सुनते हैं और उनके कष्टों का निवारण करते हैं. यह व्रत पितरों की आत्मिक तृप्ति और वंश वृद्धि के लिए भी बेहद कल्याणकारी माना जाता है.
योगिनी एकादशी पूजा विधि:
आप इस साल योगिनी एकादशी का व्रत रखने जा रहे हैं, तो इन पांच चरणों में भगवान विष्णु की पूजा संपन्न करें:
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ (संभव हो तो पीले) वस्त्र धारण करें.
संकल्प और पूजन: भगवान श्रीहरि विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप जलाकर व्रत का संकल्प लें. उन्हें पीले फूल, तुलसी दल (तुलसी के पत्ते), धूप-दीप और पंचामृत अर्पित करें.
मंत्र जाप: दिनभर फलाहार या निर्जला व्रत रखते हुए ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का मानसिक जाप करें.
सायंकालीन पूजा: शाम के समय विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें अथवा योगिनी एकादशी की प्रामाणिक व्रत कथा का श्रवण करें.
पारण (व्रत खोलना): अगले दिन (द्वादशी तिथि) सुबह किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा का दान करने के बाद ही अपना व्रत खोलें.
एक नज़र में: तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्वपूर्ण जानकारियां
| विषय | विवरण |
| व्रत की तारीख | 10 जुलाई |
| मुख्य देवता | भगवान श्रीहरि विष्णु |
| मुख्य लाभ | अनजाने पापों से मुक्ति, पितृ दोष से राहत, उत्तम स्वास्थ्य और समृद्धि. |
| एकादशी तिथि शुरू | 10 जुलाई, सुबह 08:16 बजे से |
| एकादशी तिथि समाप्त | 11 जुलाई, सुबह 05:22 बजे तक |
| पूजा का मुख्य दिन | 10 जुलाई (उदया तिथि न होने पर भी सर्वोत्तम) |
एकादशी व्रत के 3 जरूरी नियम
एकादशी व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए इन तीन नियमों का पालन अनिवार्य रूप से करें:
तुलसी दल का नियम: भगवान विष्णु की पूजा बिना तुलसी के अधूरी मानी जाती है. ध्यान रहे कि एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़े जाते, इसलिए इन्हें एक दिन पहले (दशमी तिथि को) ही तोड़कर रख लें.
दान का महत्व: द्वादशी के दिन किसी जरूरतमंद को दान दिए बिना एकादशी का पुण्य फल पूरा नहीं मिलता. 11 जुलाई को सुबह तिथि समाप्त होने के बाद पहले दान करें, फिर स्वयं सात्विक भोजन ग्रहण कर पारण करें.
सात्विकता का पालन: एकादशी के दिन तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन) और चावल का पूरी तरह से त्याग करना चाहिए. इस दिन पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य और सात्विकता का पालन करें.
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