भारतीय बाजार में तेजी से बढ़ते ‘सुपरफूड्स’, कम लागत और बेहद कम पानी में ऐसे तैयार होगी फसल

भारतीय बाजार में तेजी से बढ़ते ‘सुपरफूड्स’, कम लागत और बेहद कम पानी में ऐसे तैयार होगी फसल


Benefits Of Millets Superfood: पिछले कुछ सालों में भारतीय बाजार में सेहत को लेकर लोगों की सोच काफी बदल गई है. अब लोग सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि पोषण को भी ध्यान में रखकर खाना खरीद रहे हैं. इसी वजह से बाजार में मोटे अनाज यानी मिलेट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिन्हें अब बाजारों में सुपरफूड” के नाम से जाना जाने लगा है.  जहां एक समय में बाजरा, ज्वार और रागी जैसे अनाज, को गरीबों का खाना समझा जाता था, आज के समय में यही सेहत के लिए सबसे अच्छे विकल्प माने जा रहे हैं. 

कम पानी में तैयार होते हैं ये सुपरफूड्स

इन सुपरफूड्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें बहुत कम पानी में उगाया जा सकता है.  रिसर्च के मुताबिक चावल की तुलना में मोटे अनाज उगाने में करीब 30 से 40 प्रतिशत तक कम पानी लगता है. यानी जहां एक किलो चावल उगाने में हजारों लीटर पानी खर्च हो जाता है, वहीं मोटे अनाज की खेती में इसकी बहुत कम जरूरत पड़ती है. यही वजह है कि जिन इलाकों में बारिश कम होती है या पानी की कमी रहती है, वहां भी किसान आसानी से इनकी खेती कर पा रहे हैं. 

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कम लागत और ज्यादा मुनाफे वाली खेती

खेती में लागत के मामले में भी मोटे अनाज किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रहे हैं. इन फसलों में रासायनिक खाद और कीटनाशकों की जरूरत बहुत कम पड़ती है, क्योंकि यह प्राकृतिक रूप से कीड़ों और बीमारियों से लड़ने में सक्षम होती हैं. इससे किसानों का खर्च काफी हद तक कम हो जाता है और मुनाफा बढ़ जाता है. इसके साथ ही यह फसलें सिर्फ 75 से 120 दिनों के अंदर तैयार हो जाती हैं, जिससे किसान एक ही साल में कई बार फसल ले सकते हैं. 

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि कम पानी और कम लागत में तैयार होने वाले यह सुपरफूड्स न सिर्फ किसानों की आमदनी बढ़ा रहे हैं, बल्कि देश में पानी बचाने और सेहत सुधारने की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित हो रहे हैं. 

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