ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष ने राम मंदिर चोरी मामले में बड़ा आरोप लगाया है. मौलाना साजिद राशीदी ने रविवार को कहा है कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान मिले चंदे में कथित हेराफेरी की जांच की मांग, और वीएचपी के फाइनेंस और नेतृत्व पर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं.
रशीदी ने दावा किया है कि राम मंदिर आंदोलन के समय से ही वीएचपी हमेशा शक के घेरे में रही है. उन्होंने कहा कि वीएचपी ऐसा नाम है, जो राम मंदिर के आंदोलन के समय से हमेशा से शक के घेरे में रही है. रथ यात्रा के दौरान 1400 करोड़ इकट्ठे किए गए थे. लेकिन अबतक किसी तरह का हिसाब नहीं दिया गया है. हाल ही में चंदा चोरी के आरोपों पर राशीदी ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी चंपत राय को जानबूझकर दूर रखा जा रहा है.
रशीदी बोले- साफ तौर पर वीएचपी को क्लीन चिट दी जाएगी
रशीदी ने कहा कि राम मंदिर मामले में चंपत राय का नाम साफ तौर पर नजर आ रहा है. लेकिन वीएचपी को क्लीन चिट दी जाएगी. कुछ ऐसी गतिविधियां की जाएंगी, जिससे लगेगा कि सब ठीक चल रहा है. चंपत राय के बारे में कहा जाएगा कि नहीं, बिल्कुल पाक साफ है. उन्होंने कुछ नहीं किया. राय जानबूझकर वीएचपी से खुद को दूर कर रहे हैं. वह जांच से बचना चाहते हैं.
रशीदी ने कहा है कि वीएचपी का जैसे ही नाम आता है, तो देश के लोगों के सामने कई बातें आ जाती हैं. कहीं न कहीं 1400 करोड़ वाला मुद्दा. यह मुद्दा मिलकर एक बड़ा विवाद बन सकता है. चंपत राय चालाक आदमी हैं.
एसआईटी मामले की जांच में जुटी है
इधर, राम मंदिर खजाना चोरी मामले में एसआईटी ने राम मंदिर का दौरा किया. 3 जुलाई को राम मंदिर में दान के कथित गबन की जांच कर रही एसआईटी ने अपनी जांच को आगे बढ़ाने के लिए मंदिर परिसर का दौरा किया. यूपी सरकार ने एक जुलाई को एसआईटी को अपनी जांच पूरी करने के लिए 15 दिन का समय दिया था. इससे उनहें जांच को बढ़ाने और जांच की अनुमति मिल गई. 25 जून को इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई. इसमें 8 लोग अरेस्ट हुए. इसके अलावा ट्रस्ट से अपने अपने पद से चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया.
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