सिंधु घाटी सभ्यता के लोग कैसे करते थे खेती? खुदाई में मिले थे हैरान कर देने वाले ये सबूत

सिंधु घाटी सभ्यता के लोग कैसे करते थे खेती? खुदाई में मिले थे हैरान कर देने वाले ये सबूत


Farming In Indus Valley Civilization: आज की आधुनिक खेती में मशीनें, उन्नत बीज और नई तकनीक का इस्तेमाल होता है. लेकिन हजारों साल पहले जब इनमें से कुछ भी नहीं था. तब भी लोग खेती करना अच्छी तरह जानते थे. सिंधु घाटी सभ्यता इसका सबसे बड़ा उदाहरण मानी जाती है. पुरातात्विक खुदाई में मिले अवशेष बताते हैं कि उस दौर के लोग खेती को सिर्फ खाने का साधन नहीं बल्कि अपने जीवन और व्यापार की मजबूत नींव मानते थे.

उन्होंने नदियों के किनारे बसकर प्राकृतिक संसाधनों का बेहतरीन इस्तेमाल किया और मौसम के हिसाब से अलग अलग फसलें उगाईं. खुदाई में मिले अनाज के दाने, खेतों के निशान, कृषि उपकरण और भंडारण की स्ट्रक्चर इस बात की गवाही देते हैं कि उस समय की कृषि व्यवस्था काफी व्यवस्थित और विकसित थी. यही वजह है कि सिंधु घाटी सभ्यता को दुनिया की सबसे उन्नत प्राचीन सभ्यताओं में गिना जाता है.

खुदाई से निकल के आए खेती के कई सबूत

पुरातत्वविदों को हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, कालीबंगन, लोथल और राखीगढ़ी जैसी जगहों की खुदाई में ऐसे कई सबूत मिले हैं जो उस समय की खेती को समझने में मदद करते हैं. कालीबंगन में खेतों की जुताई के निशान मिले हैं,. जिनसे पता चलता है कि किसान तय दूरी पर कतारों में फसल बोते थे. 

इसके अलावा गेहूं, जौ, तिल, सरसों, मटर और कपास के अवशेष भी मिले हैं. खास बात यह है कि सिंधु घाटी सभ्यता को दुनिया में कपास की शुरुआती खेती करने वाली सभ्यताओं में भी गिना जाता है. खुदाई में बड़े अनाज भंडार भी मिले हैं. जिससे साफ होता है कि लोग फसल को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की तकनीक जानते थे. 

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नदियों और मौसम के हिसाब से होती थी खेती

सिंधु घाटी सभ्यता के ज्यादातर शहर नदियों के किनारे बसे थे. जिससे खेती के लिए पानी की कमी नहीं होती थी. माना जाता है कि किसान बाढ़ के बाद उपजाऊ हुई जमीन पर खेती करते थे और प्राकृतिक नमी का पूरा फायदा उठाते थे. मौसम के अनुसार अलग अलग फसलें उगाई जाती थीं. जिससे पूरे साल के लिए अनाज बना रहता था.

बैलों की मदद से खेत जोते जाते थे और साधारण कृषि उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता था. उस समय की कृषि व्यवस्था इतनी सही थी कि इससे न सिर्फ स्थानीय आबादी की जरूरतें पूरी होती थी. बल्कि ज्यादा अनाज उगाकरा उसका व्यापार भी किया जाता था. 

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