देहरादून: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को देहरादून में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में युवाओं और प्रतियोगी छात्रों से संवाद किया. आम तौर पर राजनीतिक कार्यक्रमों में केंद्र और राज्य की बीजेपी सरकार पर तीखे हमले करने वाले राहुल गांधी इस मंच पर अलग अंदाज में दिखाई दिए. उन्होंने अपने संबोधन का अधिकांश हिस्सा शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में अनिश्चितता, कथित पेपर लीक और प्रतियोगी छात्रों के भविष्य पर केंद्रित रखा.
कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने बीजेपी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को लेकर कोई बड़ा व्यक्तिगत अथवा सीधा राजनीतिक हमला नहीं किया. कार्यक्रम का स्वर परंपरागत चुनावी रैली के बजाय छात्रों के अनुभव सुनने और परीक्षा व्यवस्था की कमियों पर चर्चा करने वाला रहा.
देहरादून के बन्नू स्कूल मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में उत्तराखंड समेत विभिन्न स्थानों से आए प्रतियोगी छात्र और युवा शामिल हुए. कांग्रेस ने इसे शिक्षा और रोजगार से जुड़े सवालों पर छात्रों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का अभियान बताया.
छात्रों ने राहुल गांधी के सामने रखीं अपनी परेशानियां
कार्यक्रम के दौरान कई छात्रों ने मंच से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में आने वाली समस्याओं को साझा किया. छात्रों ने बताया कि सरकारी नौकरी की तैयारी में उनके जीवन के कई वर्ष निकल जाते हैं. कोचिंग फीस, किराया, भोजन, किताबें और परीक्षा शुल्क के कारण परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है.
कार्यक्रम में दिखाई गई प्रस्तुति में दावा किया गया कि कई अभ्यर्थी पांच वर्षों तक प्रतिदिन करीब 10 घंटे पढ़ाई करते हैं और इस दौरान उनकी तैयारी पर लगभग नौ लाख रुपये तक खर्च हो जाते हैं. इसके बावजूद परीक्षा समय पर न होना, भर्ती प्रक्रिया का लंबा खिंचना या परीक्षा विवादों में फंसना युवाओं को निराश करता है.
राहुल गांधी ने छात्रों के अनुभव सुनते हुए कहा कि किसी युवा की मेहनत और उसके परिवार के संसाधनों को एक अव्यवस्थित परीक्षा प्रणाली के कारण बर्बाद नहीं होने दिया जाना चाहिए. उन्होंने परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, आधुनिक और जवाबदेह बनाने की जरूरत पर जोर दिया.
‘यह केवल पेपर लीक नहीं, युवाओं के भविष्य की चोरी’
राहुल गांधी ने कार्यक्रम से पहले भी पेपर लीक के मुद्दे को उठाते हुए इसे केवल परीक्षा का प्रश्न नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य की चोरी बताया था. उन्होंने आरोप लगाया था कि सख्त नकल विरोधी कानून बनाए जाने के बावजूद परीक्षाओं से जुड़ी अनियमितताओं और पेपर लीक के मामले सामने आते रहे हैं.
कार्यक्रम की प्रस्तुति में भी देश की कई परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, परीक्षाओं के कथित सौदे और उससे प्रभावित छात्रों से संबंधित दावे रखे गए. हालांकि ये आंकड़े और आरोप कांग्रेस की ओर से तैयार प्रस्तुति का हिस्सा थे. इनका स्वतंत्र आधिकारिक सत्यापन आवश्यक है.
राहुल गांधी ने कहा कि परीक्षा में गड़बड़ी का असर केवल एक अभ्यर्थी तक सीमित नहीं रहता. इससे उसके पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति, भविष्य की योजना और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है. वर्षों तक तैयारी करने वाले छात्र के लिए परीक्षा रद्द होना या भर्ती प्रक्रिया का अदालत और जांच के बीच फंस जाना एक बड़ा झटका होता है.
राजनीतिक भाषण से ज्यादा छात्र संवाद पर जोर
‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की सबसे अहम बात यह रही कि राहुल गांधी ने मंच को पूर्ण राजनीतिक रैली में बदलने से परहेज किया. उन्होंने उत्तराखंड की धामी सरकार या बीजेपी नेतृत्व को सीधे निशाने पर लेने के बजाय व्यवस्था से जुड़े प्रश्न उठाए.
कार्यक्रम में राहुल गांधी का जोर इस बात पर रहा कि छात्रों की समस्याओं को केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. युवाओं का भविष्य सरकार, परीक्षा संस्थाओं, शिक्षा व्यवस्था और राजनीतिक दलों सभी की साझा जिम्मेदारी है.
कांग्रेस ने इस आयोजन को युवाओं से सीधे संपर्क स्थापित करने की अपनी मुहिम के रूप में पेश किया. पार्टी इससे पहले राजस्थान के कोटा में भी छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर कार्यक्रम कर चुकी है. देहरादून का आयोजन उत्तराखंड में कांग्रेस के युवा संवाद अभियान का महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है.
परीक्षा संस्थाओं की जवाबदेही तय करने की मांग
राहुल गांधी ने कहा कि केवल परीक्षा आयोजित कर देना पर्याप्त नहीं है. परीक्षा कराने वाली संस्थाओं की जिम्मेदारी और जवाबदेही भी स्पष्ट होनी चाहिए. प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा केंद्र, डिजिटल सुरक्षा, मूल्यांकन और परिणाम जारी होने तक पूरी प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिस पर अभ्यर्थी भरोसा कर सकें.
कार्यक्रम में दिखाई गई प्रस्तुति के अंतिम हिस्से में परीक्षा व्यवस्था में सुधार से जुड़े तीन प्रमुख प्रस्ताव रखे गए. इनमें 21वीं सदी के अनुरूप आधुनिक परीक्षा प्रणाली तैयार करना, स्वतंत्र और जवाबदेह संस्थाओं की स्थापना तथा छात्रों के हितों की रक्षा के साथ पेपर लीक में शामिल लोगों पर कठोर कार्रवाई करना शामिल था.
राहुल गांधी ने संकेत दिया कि परीक्षा सुधार केवल तकनीकी बदलाव से संभव नहीं होगा. इसके लिए संस्थागत पारदर्शिता, जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था और गड़बड़ी की स्थिति में समयबद्ध कार्रवाई जरूरी है.
सरकारी नौकरी से बाहर भी तैयार हों अवसर
कार्यक्रम में प्रतियोगी छात्रों के लिए सरकारी नौकरी के अलावा रोजगार के वैकल्पिक रास्तों पर भी चर्चा हुई. प्रस्तुति में यह सवाल उठाया गया कि वर्षों तक सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले छात्रों के पास असफलता की स्थिति में कौन से विकल्प उपलब्ध हैं.
राहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य केवल परीक्षार्थी तैयार करना नहीं होना चाहिए. युवाओं को कौशल, रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने की भी आवश्यकता है. सरकारी नौकरियों की संख्या सीमित होने के कारण ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जिसमें छात्रों की तैयारी और ज्ञान का इस्तेमाल दूसरे रोजगार क्षेत्रों में भी हो सके.
पेपर लीक से छात्रों पर पड़ रहे मानसिक असर का मुद्दा
‘छात्रों की गूंज’ की प्रस्तुति में प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े तनाव और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य का प्रश्न भी उठाया गया. इसमें कथित पेपर लीक और परीक्षा संबंधी निराशा से प्रभावित छात्रों को श्रद्धांजलि देने वाली स्लाइड भी दिखाई गई.
राहुल गांधी ने कहा कि किसी परीक्षा की तैयारी करने वाला युवा केवल अपना समय नहीं, बल्कि परिवार की उम्मीदें और संसाधन भी दांव पर लगाता है. ऐसे में व्यवस्था की गलती का बोझ छात्र पर डालना अन्याय है. उन्होंने छात्रों के लिए सुरक्षा और शिकायतों के त्वरित निस्तारण की व्यवस्था बनाए जाने की जरूरत बताई.
उत्तराखंड को कार्यक्रम के लिए चुनने के पीछे क्या वजह?
उत्तराखंड में पिछले कुछ वर्षों के दौरान भर्ती परीक्षाओं और कथित पेपर लीक से जुड़े मुद्दे राजनीतिक चर्चा का केंद्र रहे हैं. कांग्रेस इसी वजह से देहरादून के कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्तर के छात्र अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में पेश कर रही है. कार्यक्रम से पहले कांग्रेस ने कहा था कि उत्तराखंड में युवाओं की भर्ती, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी चिंताओं को मंच देना इसकी प्रमुख प्राथमिकता है.
राजनीतिक दृष्टि से भी यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है. उत्तराखंड में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं और राज्य में युवाओं की बड़ी आबादी चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती है. हालांकि राहुल गांधी ने शुक्रवार के मंच से चुनावी राजनीति की तुलना में छात्र समस्याओं पर अधिक जोर दिया.
कार्यक्रम स्थल को लेकर हुआ था विवाद
राहुल गांधी का कार्यक्रम पहले देहरादून के परेड ग्राउंड में प्रस्तावित था, लेकिन अनुमति को लेकर विवाद के बाद आयोजन स्थल बदलकर रेसकोर्स स्थित बन्नू स्कूल मैदान किया गया. इसे लेकर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विरोध भी दर्ज कराया था.
कार्यक्रम से एक दिन पहले तैयारियों के दौरान एक दुखद दुर्घटना भी हुई थी. कार्यक्रम स्थल पर लोहे की रॉड गिरने से कांग्रेस के एक कार्यकर्ता की मौत हो गई थी. इस घटना से पार्टी कार्यकर्ताओं में शोक का माहौल रहा.
युवाओं के जरिए नई राजनीतिक जमीन तलाश रही कांग्रेस
राहुल गांधी का यह कार्यक्रम भले ही सीधे राजनीतिक हमलों से दूर रहा, लेकिन इसके राजनीतिक मायने भी हैं. कांग्रेस बेरोजगारी, पेपर लीक, भर्ती में देरी और शिक्षा की बढ़ती लागत जैसे मुद्दों के जरिए युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास कर रही है.
‘छात्रों की गूंज’ के मंच से राहुल गांधी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि कांग्रेस छात्रों की समस्याओं को केवल चुनाव के समय उठाया जाने वाला विषय नहीं, बल्कि व्यापक राष्ट्रीय प्रश्न मानती है. कार्यक्रम में तीखे राजनीतिक आरोपों की जगह छात्रों के अनुभव, आंकड़ों की प्रस्तुति और व्यवस्था में सुधार के प्रस्तावों को प्रमुखता देकर उन्होंने अपने युवा संवाद अभियान को अलग स्वर देने का प्रयास किया.
देहरादून का यह आयोजन अब इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि राहुल गांधी ने प्रदेश की बीजेपी सरकार पर सीधा हमला किए बिना शिक्षा और युवाओं की चिंताओं को केंद्र में रखा. आने वाले समय में कांग्रेस इस अभियान को अन्य राज्यों तक ले जाती है या इसे उत्तराखंड में चुनावी मुद्दे के रूप में आगे बढ़ाती है, इस पर भी नजर रहेगी.






