सिंदूर लगाने की शुरुआत कहां से हुई थी! जानें सुहाग का प्रतीक सिंदूर का महत्व

सिंदूर लगाने की शुरुआत कहां से हुई थी! जानें सुहाग का प्रतीक सिंदूर का महत्व


हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए सिंदूर का काफी महत्व होता है. इसे सुहाग का प्रतीक भी माना जाता है. आज जानेंगे आखिर कहां से हुई थी सिंदूर लगाने की शुरुआत?

हिंदू धर्म में शादीशुदा महिलाएं अपनी मांग में पति के नाम का सिंदूर लगाती है. सुहागिन महिलाओं द्वारा मांग में सिंदूर लगाने से उनकी शादीशुदा जिंदगी अच्छी बीतती है.

हिंदू धर्म में शादीशुदा महिलाएं अपनी मांग में पति के नाम का सिंदूर लगाती है. सुहागिन महिलाओं द्वारा मांग में सिंदूर लगाने से उनकी शादीशुदा जिंदगी अच्छी बीतती है.

सिंदूर लगाने के पीछे शिव पुराण में एक कथा वर्णित है, जिसमें बताया गया है कि शिव भगवान को अपना पति बनाने के लिए माता पार्वती ने कठोर तपस्या की थी. जब भगवान शिव ने माता पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार किया तो उन्होंने उनकी मांग में सुहाग का प्रतीक सिंदूर भरा.

सिंदूर लगाने के पीछे शिव पुराण में एक कथा वर्णित है, जिसमें बताया गया है कि शिव भगवान को अपना पति बनाने के लिए माता पार्वती ने कठोर तपस्या की थी. जब भगवान शिव ने माता पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार किया तो उन्होंने उनकी मांग में सुहाग का प्रतीक सिंदूर भरा.

शिव भगवान ने माता पार्वती की मांग में सिंदूर भरते हुए कहा कि, जो भी स्त्री शादी के बाद अपनी मांग में सिंदूर लगाएगी, उसके पति की आयु लंबी होगी. तभी से विवाहित महिलाएं सिंदूर लगाने लगी.

शिव भगवान ने माता पार्वती की मांग में सिंदूर भरते हुए कहा कि, जो भी स्त्री शादी के बाद अपनी मांग में सिंदूर लगाएगी, उसके पति की आयु लंबी होगी. तभी से विवाहित महिलाएं सिंदूर लगाने लगी.

हिंदू धर्म में सिंदूर को पांच भाग्य में शामिल किया जाता है.

हिंदू धर्म में सिंदूर को पांच भाग्य में शामिल किया जाता है.

जो स्त्री शादी के बाद पति के नाम का सिंदूर लगाती है, उनका वैवाहिक जीवन खुशनुमा रहता है और पति-पत्नी के बीच प्यार भी बरकरार रहता है.

जो स्त्री शादी के बाद पति के नाम का सिंदूर लगाती है, उनका वैवाहिक जीवन खुशनुमा रहता है और पति-पत्नी के बीच प्यार भी बरकरार रहता है.

Published at : 27 Jun 2025 08:50 AM (IST)

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