12% से अधिक अल्कोहलिक दवाओं पर सरकार सख्त, डॉक्टर की पर्ची और लाइसेंस के बिना नहीं होगी बिक्री

12% से अधिक अल्कोहलिक दवाओं पर सरकार सख्त, डॉक्टर की पर्ची और लाइसेंस के बिना नहीं होगी बिक्री


Alcohol Based Drug: अगर आप भी बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीद लेते हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है. केंद्र सरकार ने 12 प्रतिशत से ज्यादा एथिल अल्कोहल वाली औषधीय दवाओं की बिक्री और निर्माण को लेकर नियम सख्त कर दिए हैं. अब ऐसी दवाओं को पहले की तरह सामान्य तरीके से न तो बनाया जा सकेगा और न ही मेडिकल स्टोर से आसानी से खरीदा जा सकेगा. सरकार ने इन दवाओं को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 के तहत लाइसेंस व्यवस्था में लाते हुए, ड्रग्स रूल्स 1945 की अनुसूची एच1 में शामिल कर दिया है.

इसका मतलब है कि अब इनकी बिक्री केवल रजिस्टर्ड डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर ही होगी और मेडिकल स्टोर को हर बिक्री का रिकॉर्ड भी रखना होगा. स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार यह फैसला उन औषधीय दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए लिया गया है जिनमें एथिल अल्कोहल की मात्रा काफी ज्यादा होती है. 

किन दवाओं पर लागू होगा नया नियम? 

नया नियम उन ओरल मेडिसिनल फॉर्मूलेशन पर लागू होगा, जिनमें 12 प्रतिशत से ज्यादा एथिल अल्कोहल हो और जो 30 मिलीलीटर से बड़े पैक में बेचे जाते हो. इनमें इलायची, अदरक और दूसरे सुगंधित पदार्थ से तैयार किए जाने वाले कुछ टिंचर और हर्बल लिक्विड प्रिपरेशन भी शामिल है. यह प्रोडक्ट ड्रग्स रूल की अनुसूची के तहत लाइसेंस से छूट प्राप्त कैटेगरी में आते थे. इसी छूट का फायदा उठाकर कुछ प्रोडक्ट में 60 से 90 प्रतिशत तक एथिल अल्कोहल का इस्तेमाल किया जा रहा था, जिससे उनके गलत इस्तेमाल की आशंका बढ़ गई थी.  

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सरकार की सख्ती के बाद अब क्या बदलेगा? 

सरकार के नए संशोधन के बाद ऐसी सभी दवाओं को लाइसेंस लेकर ही बनाया और बेचा जा सकेगा. साथ ही उन्हें अनुसूची एच1 के तहत रखा गया है. इसका सीधा असर यह होगा की दवा केवल रजिस्टर्ड डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर मिलेगी, मेडिकल स्टोर को हर बिक्री का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना होगा, इन दवाओं की सप्लाई केवल लाइसेंस प्राप्त फार्मास्यूटिकल चैन के जरिए ही होगी और बिना नियम की अनुमति के इनका निर्माण और वितरण भी नहीं किया जा सकेगा. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियम राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित होने के 6 महीने के बाद लागू होगा, ताकि निर्माता और विक्रेता नए नियमों के अनुसार अपनी व्यवस्था कर सके. 

सरकार ने सख्ती क्यों की? 

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इलायची और अदरक जैसे पदार्थों से बनने वाले कुछ टिंचर मूल रूप से औषधीय उपयोग के लिए तैयार किए जाते हैं. इन्हें पाचन संबंधी समस्याओं सहित दूसरे चिकित्सीय जरूरतों में इस्तेमाल किया जाता रहा है, हालांकि जांच में सामने आया कि कुछ प्रोडक्ट में एथिल अल्कोहल की मात्रा 80 से 90 प्रतिशत तक थी, जिसके कारण इनका इस्तेमाल शराब के ऑप्शन के रूप में किया जाने लगा. इसी को देखते हुए सरकार ने नियमों में बदलाव कर इन प्रोडक्ट को सख्त निगरानी के दायरे में लाने का फैसला किया है.

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