90 लाख सालाना की नौकरी ठुकरा दी! वजह सैलरी नहीं, होने वाला बॉस था

90 लाख सालाना की नौकरी ठुकरा दी! वजह सैलरी नहीं, होने वाला बॉस था


कॉरपोरेट दुनिया में अक्सर माना जाता है कि जितनी बड़ी सैलरी, उतनी जल्दी ‘हां’. लेकिन एक वायरल LinkedIn पोस्ट ने इस सोच को चुनौती दे दी है. Agile IBS के संस्थापक और वर्कप्लेस परफॉर्मेंस स्ट्रैटेजिस्ट मनोज कुमार ने एक ऐसी घटना साझा की है, जिसने न सिर्फ उन्हें चौंकाया बल्कि हजारों मिड-लेवल प्रोफेशनल्स को भी अपनी नौकरी और मैनेजर के रिश्ते पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर कर दिया.

90 लाख का ऑफर ठुकराया

मनोज ने बताया कि कुछ महीने पहले उन्हें एक लीडरशिप हायरिंग का असाइनमेंट मिला था. कई हफ्तों की तलाश, इंटरव्यू और चर्चाओं के बाद आखिरकार सही उम्मीदवार मिल गया. कंपनी ने उसे ₹90 लाख सालाना का आकर्षक पैकेज ऑफर किया. एक रिक्रूटर के तौर पर मनोज को लगा कि अब भर्ती की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है.

लेकिन तभी कहानी में ऐसा मोड़ आया, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी. उम्मीदवार ने ऑफर ठुकरा दिया. इस फैसले से कंपनी भी निराश हुई और मनोज का यह रिक्रूटमेंट असाइनमेंट भी हाथ से निकल गया. जब उन्होंने उम्मीदवार से इसकी वजह पूछी, तो उन्हें लगा कि शायद सैलरी कम लगी होगी या किसी दूसरी कंपनी ने बेहतर पैकेज दे दिया होगा, लेकिन उम्मीदवार का जवाब कुछ और ही था.

ऑफर नहीं लीडरशिप को दी तवज्जो
 
उन्होंने कहा कि ऑफर अच्छा है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि जिस व्यक्ति को मैं रिपोर्ट करूंगा, उसके साथ काम करके मुझे आनंद आएगा. यही एक वाक्य मनोज के मन में घर कर गया. उन्होंने महसूस किया कि उम्मीदवार ने न तो कंपनी को ठुकराया था और न ही पैसे को. उसने उस अनुभव को ठुकराया था, जो उसे अपने होने वाले मैनेजर के साथ काम करते हुए मिलने वाला था

इस अनुभव को साझा करते हुए मनोज ने लिखा, ‘लोग सिर्फ कंपनियां नहीं चुनते, वे अपने लीडर्स भी चुनते हैं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘अच्छी सैलरी किसी व्यक्ति को कंपनी जॉइन करने के लिए मना सकती है, लेकिन एक अच्छा मैनेजर उसे वहां टिके रहने की वजह देता है.’

मानसिक शांति करियर के लिए बन चुकी अहम हिस्सा

आज के समय में यह बात पहले से कहीं ज्यादा मायने रखती है. खासकर मिड-लेवल कर्मचारियों के लिए, जिनके लिए सिर्फ वेतन नहीं, बल्कि वर्क कल्चर, मैनेजर का व्यवहार, सीखने के अवसर और मानसिक शांति भी करियर का अहम हिस्सा बन चुके हैं.

मनोज का मानना है कि एचआर टीमों और बिजनेस लीडर्स को सिर्फ वेतन पैकेज बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि बेहतर मैनेजर तैयार करने पर भी उतना ही ध्यान देना चाहिए.

उन्होंने लिखा, ‘कई बार किसी उम्मीदवार के ऑफर ठुकराने की सबसे बड़ी वजह सैलरी नहीं होती, बल्कि वह व्यक्ति होता है जिसके साथ उसे काम करना है.’

पोस्ट पर बड़ी संख्या में प्रोफेशनल्स ने अपनी राय साझा की. कई लोगों ने लिखा कि उन्होंने भी करियर में ऐसे मौके छोड़े हैं, जहां पैसा ज्यादा था लेकिन मैनेजर या कार्य संस्कृति को लेकर भरोसा नहीं था.

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