Basil Cultivation Tips: खेती में अब किसान ऐसी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं. जिनमें कम लागत के साथ बेहतर कमाई की संभावना हो. औषधीय पौधों की खेती इसी वजह से तेजी से लोकप्रिय हो रही है. तुलसी भी ऐसी ही फसल है, जिसकी मांग आयुर्वेदिक उत्पादों, हर्बल कंपनियों और कई तरह के प्राकृतिक उत्पादों में बनी रहती है.
लेकिन अच्छी कमाई के लिए सिर्फ पौधे लगा देना काफी नहीं है. सही समय पर बुवाई, बेहतर किस्म का चुनाव और वैज्ञानिक तरीके से देखभाल करना बेहद जरूरी है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार अगर किसान शुरुआत से कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें. तो तुलसी की खेती से अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है.
पौध तैयार करने का सही समय और रोपाई का तरीका
तुलसी की खेती से अगर अच्छा रिटर्न चाहिए. तो सबसे पहला फोकस इसकी टाइमिंग पर होना चाहिए. कृषि वैज्ञानिकों के मुताबि जून और जुलाई का महीना इसकी नर्सरी तैयार करने के लिए सबसे बेस्ट माना जाता है. एक एकड़ खेत के लिए लगभग 250 से 300 ग्राम बीज काफी होते हैं.
जब नर्सरी में पौधे करीब 4 से 5 हफ्तों के हो जाएं और उनकी लंबाई 10-15 सेंटीमीटर हो जाए. तब उन्हें मुख्य खेत में ट्रांसप्लांट कर देना चाहिए. रोपाई करते समय ध्यान रखें कि लाइनों के बीच की दूरी लगभग 45 सेंटीमीटर और पौधों के बीच की दूरी 30 सेंटीमीटर होनी चाहिए. इस सही गैप की वजह से पौधों को फैलने के लिए पूरी जगह और हवा मिलती है, जिससे उनकी ग्रोथ शानदार होती है.
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कटाई से लेकर बिक्री तक इन बातों का रखें ध्यान
तुलसी एक ऐसी फसल है जिसे बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती. लेकिन मिट्टी में हल्की नमी बनी रहनी चाहिए. बारिश के मौसम में तो सिंचाई की टेंशन नहीं होती, पर गर्मी के दिनों में हफ्ते-दस दिन में एक बार पानी जरूर देना चाहिए. सबसे खास बात जो वैज्ञानिक बताते हैं. वह है इसकी कटाई का सही तरीका. जब पौधे पर फूल आने लगें.
तब जमीन से करीब 15-20 सेंटीमीटर ऊपर से इसकी कटाई करनी चाहिए. इससे फायदा यह होता है कि नीचे से नई शाखाएं दोबारा तेजी से फूटती हैं और आप एक ही सीजन में 2 से 3 बार तक पैदावार ले सकते हैं. पत्तियों को हमेशा छांव में सुखाएं जिससे उनका नेचुरल तेल और खुशबू बरकरार रहे और मार्केट में आपको एकदम टॉप क्लास के दाम मिलें.
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