क्या सरकार कभी भी कर सकती है इंटरनेट शटडाउन? जानिए क्या कहते हैं नियम-कानून

क्या सरकार कभी भी कर सकती है इंटरनेट शटडाउन? जानिए क्या कहते हैं नियम-कानून


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  • 20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान इंटरनेट रोका गया।
  • जन सुरक्षा, आपातकाल में सरकार इंटरनेट बंद कर सकती है।
  • अब टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट 2023 इंटरनेट शटडाउन का नया आधार।
  • भारत में इंटरनेट शटडाउन के सर्वाधिक मामले दर्ज हुए हैं।

Internet Shutdown: 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च के दौरान सेंट्रल दिल्ली के कई इलाकों में इंटरनेट बंद कर दिया गया था. इसके अलावा कई जगहों पर सिग्नल जैमर भी लगाए थे, जो प्रोटेस्ट के दौरान इंटरनेट एक्सेस को बाधित कर रहे थे. इससे प्रदर्शनकारियों को वीडियो अपलोडिंग और लाइव स्ट्रीमिंग समेत कई चीजों में दिक्कतों का सामना करना पड़ा. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि इंटरनेट शटडाउन को लेकर नियम क्या हैं और इसे लेकर कानून क्या कहता है.

क्या होता है इंटरनेट शटडाउन?

जब इंफोर्मेशन के फ्लो को कंट्रोल करने के लिए किसी खास लोकेशन या लोगों के लिए इंटरनेट और इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन को जानबूझकर बंद किया जाता है तो उसे इंटरनेट शटडाउन कहा जाता है. इसमें इंटरनेट की स्पीड स्लो करने से लेकर किसी प्लेटफॉर्म को ब्लॉक करने तक शामिल है. 

सरकार कब बंद कर सकती है इंटरनेट?

Telecommunications Act, 2023 के सेक्शन 20(2)(b) के तहत जन सुरक्षा या पब्लिक इमरजेंसी को देखते हुए टेलीकम्युनिकेशन सर्विसेस को सस्पेंड किया जा सकता है. इसके लिए लिखित कारण देने होते हैं. किसी प्रोटेस्ट को ग्राउंड बनाकर इंटरनेट शटडाउन नहीं किया जा सकता. यह केवल जन सुरक्षा के हित या पब्लिक इमरजेंसी के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने जैसे किसी खास उद्देश्य से ही बंद किया जा सकता है. इसके ऑर्डर में एरिया, टाइम और कारण का साफ-साफ उल्लेख होना जरूरी है. इंटरनेट शटडाउन के आदेश राष्ट्रीय स्तर पर केंद्रीय गृह सचिव और राज्यों के लेवल पर राज्यों के गृह सचिव जारी कर सकते हैं. इमरजेंसी सिचुएशन में ज्वाइंट सेक्रेटरी लेवल के अधिकारी ऐसे आदेश दे सकते हैं, लेकिन इसे 24 घंटे के भीतर संबंधित अधिकारी से कंफर्म करवाना जरूरी है.

किस कानून के तहत बंद किया जा सकता है इंटरनेट?

भारत में पहले Indian Telegraph Act, 1885 के सेक्शन 5(2) और Temporary Suspension of Telecom Services (Public Emergency or Public Safety) Rules, 2017 के तहत इंटरनेट शटडाउन के आदेश जारी किए जाते थे, लेकिन अब इनकी जगह Telecommunications Act, 2023 और Telecommunications (Temporary Suspension of Services) Rules, 2024 आ गए हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, नए कानून आने के बाद भी 2024 के बाद कई बार राज्य सरकारों ने पुराने प्रावधानों के तहत इंटरनेट बंद करने के आदेश जारी किए थे. सरकार के इंटरनेट शटडाउन के आदेश को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है.

इंटरनेट शटडाउन के मामले में अच्छा नहीं है भारत का रिकॉर्ड

भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां सबसे ज्यादा बार इंटरनेट शटडाउन किया जाता है. एक्सेस नाउ की 2025 की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 65 बार इंटरनेट शटडाउन किया गया था. यह संख्या 2024 की तुलना में कम है, लेकिन एक लोकतांत्रिक देश में यह आंकड़ा बहुत मायने रखता है.

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