खराब होने के बाद स्मार्टफोन की बैटरी का क्या होता है, E-Waste बनती है या होती है Recycle?

खराब होने के बाद स्मार्टफोन की बैटरी का क्या होता है, E-Waste बनती है या होती है Recycle?


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  • इन्हें ई-वेस्ट सेंटर पर जमा कर सुरक्षित रीसायकल किया जाता है।

Smartphone Battery: स्मार्टफोन ने लोगों के काम को काफी आसान बनाने का काम किया है. कई लोग अपने स्मार्टफोन को काफी लंबे समय तक इस्तेमाल करते हैं. इतने समय से फोन के इस्तेमाल होने पर उसकी बैटरी काफी कमजोर हो जाती है. ऐसे में कई बार लोगों के मन में सवाल होता है कि पूरी तरह से स्मार्टफोन की बैटरी खराब होने के बाद उसका क्या होता है. क्या वो ई-वेस्ट बन जाती है या फिर उसे दोबारा रिसाइकिल किया जा सकता है. आइए जानते हैं इसकी पूरी सच्चाई.

क्यों खराब होती है स्मार्टफोन की बैटरी?

आपको बता दें कि ज्यादातर स्मार्टफोन में लिथियम-आयन (Lithium-ion) बैटरी का इस्तेमाल किया जाता है. हर बार चार्ज और डिस्चार्ज होने पर बैटरी एक चार्जिंग साइकिल पूरी करती है. अब जैस-जैसे साइकिल पूरी होती जाती है वैसे-वैसे बैटरी की ताकत भी कम होने लगती है. एक समय के बाद स्मार्टफोन की बैटरी जल्दी डिस्चार्ज होने लगती है या फोन गर्म होने लगता है. अब ऐसी स्थिति में आपको फोन की बैटरी रिप्लेस कर देनी चाहिए या फिर नया फोन खरीदने पर विचार करना चाहिए.

पुरानी बैटरी का क्या करना चाहिए?

अगर आपके फोन की बैटरी खराब हो गई है तो उसे कभी भी नॉर्मल डस्टबिन में नहीं फेंकना चाहिए. इससे बेहतर होगा कि आप उसे किसी रजिसटर्ड ई-वेस्ट कलेक्शन सेंटर, मोबाइल निर्माता के सर्विस सेंटर या ई-वेस्ट ड्रॉप बॉक्स में जमा कर दें.

बता दें कि कई स्मार्टफोन कंपनियां पुरानी बैटरियां वापस लेकर उनकी सेफ्टी रिसाइक्लिंग करती हैं जिससे पर्यावरण पर होने वाला नुकसान भी कम होता है. इसीलिए एक्सपर्ट्स भी सलाह देते हैं कि खराब हो चुकीं बैटरी को कभी भी यूहीं नहीं फेंकना चाहिए.

खराब हो चुकी बैटरी का क्या होता है?

अगर स्मार्टफोन की बैटरी पूरी तरह से खराब हो चुकी है और आपने उसे नॉर्मल कचरे में फेंक दिया तो वो ई-वेस्ट बन जाता है जो पर्यावरण के लिए भी काफी नुकसानदायक हो सकता है. इसीलिए हमेशा बैटरी को नॉर्मली कचरे में फेंकने से मना किया जाता है.

जानकारी के लिए बता दें कि आज कई कंपनियां और रजिस्टर्ड ई-वेस्ट रिसाइक्लिंग सेंटर खराब बैटरियों को एक जगह पर इकट्ठा करके उनका सुरक्षित तरीके से रिसाइकिल करते हैं. इस प्रोसेस में बैटरी से लिथियम, कोबाल्ट, कॉपर, निकेल और एल्युमिनियम जैसे चीजों को अलग किया जाता है. इसके बाद इनका इस्तेमाल नई बैटरियां, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और अन्य प्रोडक्ट बनाने में किया जा सकता है.

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