ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन (AEOI) ने सोशल मीडिया पर चल रही उन खबरों को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि बुशहर न्यूक्लियर प्लांट पर अटैक हुआ है. संगठन ने साफ कहा है कि यह खबर सही नहीं है और लोगों को ऐसी अफवाहों पर भरोसा नहीं करना चाहिए. ईरानी अधिकारियों के अनुसार, बुशहर न्यूक्लियर प्लांट पूरी तरह सुरक्षित है और वहां सभी काम सामान्य तरीके से चल रहे हैं. संगठन ने बताया कि प्लांट में मौजूद सभी सिस्टम ठीक तरह से काम कर रहे हैं और कहीं भी किसी तरह की रुकावट या नुकसान नहीं हुआ है.
परमाणु ऊर्जा संगठन ने यह भी कहा कि प्लांट की सुरक्षा और स्थिरता पूरी तरह बनी हुई है. वहां काम करने वाले कर्मचारी अपने नियमित काम कर रहे हैं और बिजली उत्पादन समेत सभी जरूरी गतिविधियां पहले की तरह जारी हैं. हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट तेजी से वायरल हुई थीं, जिनमें दावा किया गया था कि बुशहर प्लांट को निशाना बनाया गया है. इन खबरों के सामने आने के बाद लोगों के बीच चिंता बढ़ गई थी. हालांकि अब ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने आधिकारिक बयान जारी कर इन सभी दावों को गलत बताया है.
The Atomic Energy Organization of Iran (@aeoi_ir) has dismissed social media reports alleging an attack on the Bushehr nuclear facility, stating that the plant remains fully operational, secure, and stable, with all systems running continuously and without any disruption. pic.twitter.com/RzKZpCMn6y
— IRNA News Agency ☫ (@IrnaEnglish) July 12, 2026
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ईरान के न्यूक्लियर प्लांट पर हमले का मुद्दा
ईरान के न्यूक्लियर प्लांट पर हमले का मुद्दा पिछले कई सालों से इंटरनेशनल पॉलिटिक्स का एक प्रमुख विषय रहा है. हाल के सालों में ईरान के कई परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया गया है. ईरान के प्रमुख परमाणु केंद्रों में नतांज न्यूक्लियर फैसिलिटी, फोर्डो फ्यूल एनरिचमेंट प्लांट और इस्फ़हान न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी सेंटर शामिल हैं. जून 2025 में इजरायल और ईरान के बीच तनाव के दौरान इजरायल ने ईरान के कई परमाणु और सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए थे. ईरान ने दावा किया कि उसके कुछ परमाणु ठिकानों को नुकसान पहुंचा, जबकि इजरायल का कहना था कि उसका मकसद ईरान की परमाणु क्षमता को कमजोर करना था. इसके बाद अमेरिका ने भी कुछ परमाणु प्लांट पर सैन्य कार्रवाई की थी. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने उस समय कहा था कि कुछ परमाणु स्थलों को नुकसान पहुंचा है, लेकिन तत्काल बड़े पैमाने पर रेडिएशन रिसाव के संकेत नहीं मिले थे.
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