ईरान पर अटैक के लिए ट्रंप को क्यों निकालना पड़ा F-22 रैप्टर? सबसे खतरनाक, जिसने मचाई तबाही

ईरान पर अटैक के लिए ट्रंप को क्यों निकालना पड़ा F-22 रैप्टर? सबसे खतरनाक, जिसने मचाई तबाही


होर्मुज में ईरान की IRGC ने कमर्शियल जहाजों पर अटैक किए और स्ट्रेट को बंद करने का ऐलान कर दिया तो अमेरिका भड़क गया. उसने ईरान के छह प्रांतों में ताबड़तोड़ हमले किए. इनमें होर्मुगोजन, मरकाजी, अहवाज, बुशहर, खुजेस्तान और बलूचिस्तान-सिस्तान शामिल हैं. ईरान में इन हमलों को अंजाम देने के लिए डोनाल्ड ट्रंप को एक बार फिर F-22 रैप्टर फाइटर जेट को बाहर निकालना पड़ा. इस फाइटर जेट ने बी-2 बॉम्बर और बी-1 बॉम्बर के साथ मिलकर ईरान में तबाही मचा दी.

अमेरिका, F-22 रैप्टर को किस कदर क्लासीफाइड मानता है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका ने इस लड़ाकू विमान को इजरायल या किसी भी नाटो देश को नहीं दिया है. अमेरिका का F-35 जरूर इजरायल, ब्रिटेन, जापान समेत दूसरे नाटो देश इस्तेमाल करते हैं, लेकिन रैप्टर सिर्फ अमेरिका ने अपने लिए रखा है. यही वजह है कि सोमवार को जब F-22 ने ईरान पर कार्पेट बॉम्बिंग की तो ईरान को कानो-कान खबर नहीं लगी. ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम F-22 फाइटर जेट को पकड़ ही नहीं पाया और वो तबाही मचाकर वापस लौट गए. 

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कितना खतरनाक है F-22 रैप्टर?

F-22 रैप्टर, अमेरिकी वायु सेना के बेड़े का ऐसा 5वीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है, जो कम दृश्यता वाली तकनीकों, आधुनिक एवियोनिक्स और कुशल इंजनों का उपयोग करके एक ऐसा हवाई श्रेष्ठता वाला लड़ाकू विमान प्रदान करता है जिसका मुकाबला कोई अन्य आधुनिक सैन्य विमान नहीं कर सकता. 

कौन सी कंपनी बनाती है F-22 रैप्टर?

F-22 रैप्टर को अमेरिका की लॉकहीड मार्टिन और बोइंग मिलकर बनाती हैं. 5वीं पीढ़ी के इस फाइटर जेट में रडार क्रॉस-सेक्शन बेहद कम है, जिससे यह दुश्मन के रडार पर लगभग गायब रहता है और अपने ऑपरेशन को अंजाम देकर आसानी से निकल जाता है. 

F-22 रैप्टर की स्पीड कितनी?

F-22 की स्पीड की बात करें तो ये जेट बिना आफ्टरबर्नर यानी एक्स्ट्रा फ्यूल जलाए आवाज की स्पीड से डेढ़ गुना अधिक यानी मैक 1.5 की रफ्तार से लंबी दूरी तक उड़ान भर सकता है. इसमें अत्यधिक ताकतवर AN/APG-77 AESA रडार लगा है, जिससे यह दुश्मन को पहले देखता है और फिर सटीक निशाना लगाकर मार गिराता है. अपनी स्टेल्थ क्षमता बनाए रखने के लिए यह मिसाइलों और बमों को बाहर लटकाने की बजाय अपने अंदर छिपाकर रखता है.

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