Dairy Farming News: पशुपालन और डेयरी के काम में पशुओं को पूरे साल भर पौष्टिक और हरा चारा मिलना सबसे बड़ी चुनौती होती है. खासकर बरसात खत्म होने के बाद जब चारे की किल्लत होने लगती है तो इसका सीधा असर दुधारू पशुओं के दूध उत्पादन पर पड़ता है. लेकिन अगर आप पहले से ही इंतजाम कर के चलें तो इस दिक्कत से हमेशा के लिए छुटकारा मिल सकता है.
अगस्त के बाद यानी सितंबर का महीना आते ही मौसम में जो बदलाव होता है वह कुछ खास किस्म के चारे बोने के लिए सबसे मुफीद माना जाता है. इस समय दो खास तरह के चारे लगाकर आप सर्दियों में भी अपने पशुओं के लिए भरपूर न्यूट्रिशन का इंतजाम कर सकते हैं. जिससे डेयरी फार्म की आमदनी सीधे आसमान छूने लगेगी. जान लीजिए अपने काम की बात.
उगाएं नेपियर घास और लोबिया
पशुओं के लिए हरा चारा तैयार करने में नेपियर घास और लोबिया सबसे बढ़िया माना जाता है. अगस्त के बाद जब मानसून की भारी बारिश थोड़ी कम हो जाती है. तब इनकी बुवाई का बिल्कुल सही समय होता है. नेपियर घास एक बार लगाने के बाद कई सालों तक लगातार कटाई देती है और बहुत तेजी से बढ़ती है.
वहीं दूसरी तरफ लोबिया एक दलहनी चारा फसल है जो प्रोटीन से भरपूर होती है. जब इन दोनों को मिलाकर पशुओं को खिलाया जाता है. तो उन्हें सभी जरूरी पोषक तत्व एक साथ मिल जाते हैं. इसे खाने से गाय और भैंस की सेहत तो सुधरती ही है तो साथ ही दूध देने की क्षमता में भी बढ़ोतरी होती है.
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इन बातों का रखें ध्यान
सर्दियों के महीनों में चारे की कमी से बचने के लिए सितंबर के शुरुआती हफ्तों में ही खेत तैयार कर लेना चाहिए. खेत में पानी निकलने का अच्छा इंतजाम होना चाहिए जिससे मानसून के बाद का बचा हुआ पानी जड़ों को न सड़ाए. नेपियर घास को आप लाइनों में लगा सकते हैं और उसके बीच की खाली जगह में लोबिया की बुवाई कर सकते हैं.
लोबिया की फसल बहुत जल्दी तैयार हो जाती है जिसे आप पहली कटाई में ही नेपियर के साथ मिलाकर दे सकते हैं. इस तरीके को अपनाने से कम जमीन में भी चारे की बंपर पैदावार मिलती है और बाजार से महंगा सूखा चारा और दाना खरीदने का खर्च पूरी तरह से बच जाता है.
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