मध्य प्रदेश के धार की ऐतिहासिक भोजशाला से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है. मंगलवार (14 जुलाई) को मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि एक आंख के बदले आंख दुनिया को अंधा कर देगी. वहीं चीफ जस्टिस ने कहा कि अदालत मामले को लेकर नोटिस जारी करना चाहती है. उन्होंने कहा कि सभी पक्षों की सुविधा को देखते हुए जल्द ही किसी दिन विस्तृत सुनवाई की जाएगी.
सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील हुजैफा अहमदी ने दलील दी है कि पहले जो स्थिति थी, उसे हाई कोर्ट के आदेश से बदल दिया गया. उन्होंने कहा कि मुस्लिम पक्ष को धार्मिक गतिविधियों से पूरी तरह बाहर कर दिया गया और सुप्रीम कोर्ट आने का मौका भी नहीं मिला.
नमाज और पूजा को लेकर क्या बोले सिंघवी
अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि किसी स्थान को लेकर ऐतिहासिक दावे अलग-अलग हो सकते हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, ‘कुतुब मीनार और ताज महल को लेकर भी दावे किए जाते रहे हैं.’ सिंघवी ने यह भी कहा कि धार भोजशाला में करीब 700 सालों तक नमाज होती रही और अंग्रेजों के समय के दस्तावेज भी इसका जिक्र करते हैं. उनके मुताबिक, नमाज के साथ बसंत पंचमी और मंगलवार को पूजा होना धार्मिक सौहार्द का अच्छा उदाहरण था और इस व्यवस्था को नहीं बदला जाना चाहिए था.
मुस्लिम पक्ष ने क्या दी दलील
मुस्लिम पक्ष की ओर से वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा, ‘1995 में दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी थी कि धार्मिक गतिविधियां सौहार्दपूर्ण तरीके से जारी रहेंगी. उनके मुताबिक, इस स्थिति को अचानक बदलना गलत था. वहां 800 साल पुरानी मस्जिद है और नमाज रुकवाना बेहद सख्त कदम है.’
वहीं, सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि हाई कोर्ट के आदेश को दो महीने हो चुके हैं. इस दौरान प्रशासन ने आदेश के आधार पर आवश्यक कदम उठाए हैं और वहां शांति बनी हुई है.
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने सभी पक्षों से संयम बनाए रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि अदालत में कही गई बातों का बाहर गलत अर्थ निकाला जा सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला पहली बार सुनवाई के लिए आया है और अदालत इसे जल्द से जल्द सुनने का प्रयास करेगी.
इनपुट – निपुण सहगल
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