जून 2026 भारत के मानसून इतिहास का सबसे सूखा महीना रहा. देशभर में 40% बारिश की कमी ने चिंता बढ़ा दी थी. लेकिन जुलाई के पहले हफ्ते में मानसून ने ऐसी करवट बदली कि 9 जुलाई तक यह घाटा घटकर 14% पर आ गया. मुंबई में रिकॉर्ड बारिश हुई, मध्य और पश्चिमी भारत में अच्छी बारिश हुई. हालांकि, राहत मिली, लेकिन यह लंबी नहीं टिकी. 13 जुलाई 2026 तक एक बार फिर मानसून सुस्त पड़ गया और बारिश का घाटा बढ़कर 18% हो गया. इसके बावजूद कई जगहें ऐसी हैं, जहां पानी के छींटे तक नहीं पड़े. मौसम का अलग रंग-ढंग कहां और क्यों…
सबसे पहले जानें कि बारिश ने एक हफ्ते में कमाल कैसे दिखाया?
मौसम विभाग IMD के मुताबिक, 30 जून 2026 को देश में 40% बारिश की कमी थी, बीते 126 सालों का पांचवां सबसे सूखा जून रहा था. लेकिन फिर 1 जुलाई से मानसून ने जोर पकड़ा. 9 जुलाई तक पूरे देश में 205 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य 233.1 मिमी से 14% कम थी. मुंबई के जलाशय 10% से बढ़कर 49% भर गए, दिल्ली-NCR में भारी बारिश हुई, मध्य और पश्चिम भारत में अतिरिक्त बारिश दर्ज की गई.
तो फिर मानसून कहां और कितना सुस्त पड़ गया?
मानसून ने सबसे ज्यादा सुस्ती पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में दिखाई, जहां 37% की कमी दर्ज की गई है. सबसे ज्यादा मार इसी इलाके में पड़ी है. IMD के मुताबिक, बिहार में 53% कमी, झारखंड में 43%, मणिपुर और मिजोरम में 42% तक बारिश की कमी रही है. हालांकि, IMD ने अगले 2-3 दिनों में पूर्वोत्तर, बंगाल और बिहार में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है.
उत्तर प्रदेश: 17% की कमी, पर पूर्व-पश्चिम में अंतर
IMD के मुताबिक, UP में 1 जून से 13 जुलाई तक 158.8 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य 190.9 मिमी है. यानी 17% की कमी, लेकिन यह आंकड़ा धोखा देता है:
- पश्चिमी UP: 16% अतिरिक्त बारिश
- पूर्वी UP: 35% की भारी कमी
40 जिलों में 13 जुलाई को एक दिन में बिल्कुल बारिश नहीं हुई. मेरठ में 194% और मुजफ्फरनगर में 191% अतिरिक्त बारिश हुई, जबकि 10 जिलों में 60-99% की भारी कमी दर्ज की गई.
15 राज्यों में 20% से अधिक की कमी
| राज्य | बारिश की कमी |
| बिहार | 153% |
| झारखंड | 43% |
| पंजाब | लगभग 46% (28% से 46% तक) |
| मिजोरम | 42% |
| मणिपुर | 42% |
| छत्तीसगढ़ | 20% से अधिक |
| केरल | लगभग 30-34% |
| कर्नाटक | 20% से अधिक |
| तेलंगाना | 20% से अधिक |
| आंध्र प्रदेश | 20% से अधिक |
| गुजरात | 20% से अधिक |
इसके अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, असम, मेघालय, मणिपुर और पश्चिम बंगाल भी बारिश को तरस रहे हैं. इन 15 राज्यों में से कुछ में तो कमी 73% तक पहुंच गई है. सबसे ज्यादा प्रभावित पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत का क्षेत्र है, जहां 37% की भारी कमी दर्ज की गई है.
कुछ जिलों में तो 73% तक की कमी दर्ज की गई. दूसरी ओर महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और ओडिशा में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई. ओडिशा में 12% अतिरिक्त बारिश दर्ज की गई.
अल नीनो: इस साल की मानसून कमजोरी की जड़
इस साल मानसून के कमजोर रहने की सबसे बड़ी वजह अल नीनो है. यह प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी भाग में समुद्र की सतह के सामान्य से अधिक गर्म होने की प्राकृतिक घटना है. यह भारत में कमजोर मानसून और भयंकर गर्मी से जुड़ी है.
- NOAA ने 11 जून 2026 को अल नीनो की शुरुआत की घोषणा की.
- IMD ने पहले ही 84% संभावना के साथ सामान्य से कम बारिश का अनुमान लगाया था.
- केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश में 43% कम बारिश हुई है और जुलाई में भी मानसून कमजोर रहेगा.
IIT कानपुर के प्रोफेसर रघु मुर्तुगुड्डे के मुताबिक, ‘अल नीनो अब अकेले काम नहीं कर रहा. मेयू-बाईयू फ्रंट भी मानसून की शुरुआत और बढ़ोतरी में देरी कर रहा है.’
तो क्या यह मानसून सूखा ही गुजर जाएगा?
पर्यावरणविद सुभाष सी पांडे कहते हैं, ‘मानसून ट्रफ एक कम दबाव की पट्टी है जो आमतौर पर मध्य भारत से होकर गुजरती है. यह अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी खींचकर बारिश कराती है. लेकिन इन दिनों यह ट्रफ हिमालय की तलहटी की ओर खिसक गई है. इसकी वजह से नमी वाली हवाएं मध्य और दक्षिण भारत तक नहीं पहुंच पातीं और वहां सूखा पड़ जाता है. जब तक यह ट्रफ वापस अपनी सामान्य स्थिति में नहीं आती, तब तक बड़े इलाकों में बारिश नहीं होगी.’
IMD ने 12 जुलाई 2026 को चेतावनी जारी की:
- अगले 6-7 दिनों में उत्तर-पश्चिम, पश्चिम-मध्य भारत के मैदानी इलाकों और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बारिश कमजोर रहेगी.
- पूर्वोत्तर भारत, पश्चिम बंगाल और बिहार में अगले 2-3 दिनों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है.
- पूर्वी उत्तर प्रदेश में अगले 4-5 दिनों में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है.
IMD ने जुलाई 2026 के लिए सामान्य का 94% बारिश होने का पूर्वानुमान लगाया है. पूरे मानसून सीजन (जून-सितंबर) में सामान्य का 90% बारिश का अनुमान है.
खरीफ फसलों पर क्या असर पड़ा?
मानसून की देरी और जून में सूखे का सीधा असर खरीफ फसलों की बुआई पर पड़ा है. सभी प्रमुख फसलों का बोया गया क्षेत्र पिछले साल की तुलना में कम है. इसकी वजह है मानसून कोर क्षेत्र, जहां सिंचाई सीमित है और किसान बुआई के लिए मानसून पर निर्भर हैं. अब भी बड़ी बारिश की कमी का सामना कर रहा है.
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि 111 उच्च-प्राथमिकता वाले जिले हैं, जहां सिंचाई कवरेज 25% से कम है. लगभग 60% किसान खरीफ फसल के लिए मानसूनी बारिश पर निर्भर हैं.
मानसून की असल तस्वीर क्या है?
2026 का मानसून बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा है. जून में 40% की भारी कमी, जुलाई के पहले हफ्ते में राहत और फिर 13 जुलाई तक घाटा बढ़कर 18% होना अल नीनो इफेक्ट है. सबसे बुरी स्थिति पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत की है, जहां 37% की कमी ने खरीफ फसलों को गहरा नुकसान पहुंचाया है. 15 राज्य 20% से ज्यादा कम बारिश झेल रहे हैं.






