फसल की पत्तियां देखकर ही समझ जाएंगे कितनी होगी पैदावार, पोषक तत्व कम होने पर दिखते हैं ये संकेत

फसल की पत्तियां देखकर ही समझ जाएंगे कितनी होगी पैदावार, पोषक तत्व कम होने पर दिखते हैं ये संकेत


Leaves Symptoms of Nutrient Deficiency:  फसलों में अच्छी पैदावार केवल समय पर बुवाई, खेती और खाद देने से नहीं मिलती, बल्कि फसल की जरूरत को समय पर समझना भी उतना ही जरूरी होता है. कई बार पौधे अपनी समस्या का संकेत पहले ही देने लगते हैं, लेकिन किसान इन बदलाव पर ध्यान नहीं दे पाते हैं. पत्तियों का रंग बदलना, उनका मुड़ना आकार छोटा रह जाना या नई पत्तियों का सही तरीके से विकसित न होना इस बात का संकेत हो सकता है कि फसल में किसी जरूरी पोषक तत्व की कमी हो रही है.

कृषि एक्सपर्ट के अनुसार पौधों की अच्छी बढ़वार, जड़ों के विकास, फूल और फल बनने के लिए कई तरह के पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है. अगर इनमें से किसी भी तत्व की कमी हो जाए तो इसका सीधा असर पौधों की बढ़वार और उत्पादन पर पड़ता है. ऐसे में किसान अगर समय पर इन लक्षणों को पहचान लें तो सही पोषण से फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है. 

पौधों के लिए क्यों जरूरी होते हैं पोषक तत्व? 

इंसान के शरीर की तरह ही पौधों को भी हेल्दी विकास के लिए संतुलित पोषण चाहिए. खेत में केवल यूरिया, डीएपी, एनपीके या पोटाश का इस्तेमाल करना हमेशा पर्याप्त नहीं होता. फसल को प्रमुख पोषक तत्वों के साथ-साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों की भी जरूरत होती है. इनमें नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम और सल्फर प्रमुख है, जबकि जिंक, आयरन, मैंगनीज, बोरॉन, कॉपर, मोलिब्डेनम, क्लोरीन और निकेल जैसे सूक्ष्म तत्व भी पौधों के लिए जरूरी माने जाते हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर किसान केवल कुछ चुनिंदा उर्वरकों पर निर्भर रहते हैं और बाकी पोषक तत्वों की पूर्ति नहीं करते तो फसल की वृद्धि प्रभावित हो सकती है. 

पत्तियों से पहचानें किस पोषक तत्व की कमी 

नाइट्रोजन की कमी 

नाइट्रोजन पौधों की बढ़वार के लिए सबसे जरूरी तत्वों में से एक है. इसकी कमी होने पर सबसे पहले पुरानी पत्तियां पीली पड़ने लगती है. पौधे के बढ़वार धीमी हो जाती है, पौधा छोटा रह जाता है और नई वृद्धि भी कमजोर हो होती रहती है. लंबे समय तक कमी रहने पर उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है. 

फास्फोरस की कमी 

फास्फोरस जड़ों के विकास, फूल और बीज बनने में जरूरी भूमिका निभाते हैं. इसकी कमी होने पर पत्तियां गहरे हरे, हल्के बैंगनी या भूरे रंग की दिखाई देने लगते हैं. कई बार यह लक्षण सबसे पहले पुरानी पत्तियों पर दिखाई देते हैं, जिससे पौधों की वृद्धि और उत्पादन दोनों प्रभावित होते हैं. 

पोटैशियम की कमी 

अगर पत्तियों के किनारे पीले पड़ने लगे या जले हुए जैसे दिखाई दें, तो यह पोटैशियम की कमी का संकेत हो सकता है. पोटैशियम पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है. इसकी कमी से पौधे कमजोर हो जाते हैं और रोगों का खतरा बढ़ सकता है. 

मैग्नीशियम और सल्फर की कमी 

मैग्नीशियम की कमी होने पर पुरानी पत्तियों का रंग पीला होने लगता है, जबकि उनके नसें हरी बनी रहती है. इससे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित होती है और पौधों की ऊर्जा उत्पादन क्षमता घट जाती है. वहीं सल्फर की कमी के लक्षण नाइट्रोजन की कमी जैसे दिखते हैं, लेकिन इसमें सबसे पहले नई पत्तियां पीली पड़ती है. समय पर इसकी पूर्ति नहीं होने पर पौधे की बढ़वार रुक सकती है. 

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बिना जानकारी उर्वरकों का इस्तेमाल भी नुकसानदेह 

एक्सपर्ट्स किसानों को सलाह देते हैं कि केवल फसल कमजोर दिखने पर सीधे कीटनाशक या सूक्ष्म पोषक तत्व खरीदने के बजाय पहले समस्या की पहचान करें. आवश्यकता होने पर कृषि विभाग के अधिकारियों, कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि एक्सपर्ट्स की सलाह लें. इससे खर्चे से बचा जा सकता है और सही समाधान भी मिल सकता है. 

सही समय पर पहचान से बचा सकता है नुकसान 

अगर किसान नियमित रूप से फसल की पत्तियों और बढ़वार पर नजर रखें तो पोषक तत्व की कमी का समय रहते पता लगाया जा सकता है. सही समय पर संतुलित पोषण देने से पौधे स्वस्थ रहते हैं. जड़ों का विकास बेहतर होता है और रोगों का खतरा कम होता है. अच्छी क्वालिटी के साथ बेहतर पैदावार मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है.

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